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विजय दिवस विशेष: विद्यार्थियों के लिए कारगिल युद्ध से जुड़ी 10 अहम बातें

Vijay Diwas: 26 जुलाई को भारत में बड़े गर्व और सम्मान से ‘कारगिल विजय दिवस’ मनाया जाता है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है; यह भारत की सैन्य शक्ति, जवानों की बहादुरी और देशभक्ति का प्रतीक है।
1999 में कारगिल की बर्फीली पहाड़ियों पर भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ युद्ध, सैन्य रणनीति का एक उदाहरण था, साथ ही बलिदान और विजय का एक उदाहरण भी था। इस युद्ध में कठिन मौसम और दुश्मन की मजबूत स्थिति के बावजूद, भारतीय जवानों ने अपनी हिम्मत, साहस और समर्पण से जीत हासिल की।

  1. युद्ध की शुरुआत कैसे हुई ?

26 साल पहले, भारत और पाकिस्तान ने कारगिल की पहाड़ियों पर लड़ाई लड़ी। लड़ाई की शुरुआत हुई जब पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल की ऊँची पहाड़ियों पर घुसपैठ करके कब्जा कर लिया।
8 मई, 1999 ई। पाकिस्तान की छह नॉरदर्न लाइट इंफ़ैंट्री के कैप्टेन इफ़्तेख़ार और लांस हवलदार अब्दुल हकीम बारह सैनिकों के साथ कारगिल की आज़म चौकी पर बैठे हुए थे। उनके पास कुछ भारतीय चरवाहे थे जो कुछ दूरी पर अपने मवेशियों को चरा रहे थे। पाकिस्तानी सैनिकों ने आपस में चर्चा की कि इन चरवाहों को कैद करना चाहिए या नहीं। एक व्यक्ति ने कहा कि वे अपना राशन खा जाएंगे, जो खुद के लिए पर्याप्त नहीं है अगर उन्हें बंद कर दिया जाएगा। वे वापस चले गए। ये चरवाहे लगभग डेढ़ घंटे बाद वहाँ वापस आए, साथ में छह से सात जवानों की भारतीय सेना थी।
भारतीय सैनिकों ने क्षेत्र को दूर से देखा और वापस चले गए। 2 बजे एक लामा हेलिकॉप्टर वहाँ उड़ा। इतना नीचे कि कैप्टेन इफ़्तेख़ार को पायलट का बैज तक साफ दिखाई दे रहा था। यह पहली बार था जब भारतीय सैनिकों को पता चला कि कारगिल की पहाड़ियों की ऊँचाइयों पर बहुत से पाकिस्तानी सैनिकों ने कब्जा कर लिया है।

  1. ऑपरेशन जीत की शुरुआत भारतीय सेना ने मई 1999 में एक बड़े सैन्य अभियान, “ऑपरेशन विजय” शुरू किया, जिसका उद्देश्य घुसपैठियों को बाहर निकालना था और भारत की सीमा को बचाना था।
  2. 26 जुलाई: विजय दिवस 26 जुलाई 1999 को, लगभग 60 दिनों की लड़ाई के बाद, मिशन सफल रहा जब भारतीय सेना ने दुश्मनों को पूरी तरह पीछे धकेल दिया। 26 जुलाई को तब से “कारगिल विजय दिवस” कहा जाता है।
  3. वायुसेना की भूमिका

वायुसेना की योग्यता ऑपरेशन सफेद सागर में, भारतीय वायुसेना ने दुश्मन के बंकरों को निशाना बनाया। इससे ज़मीन और आकाश का बेहतरीन संतुलन दिखाई दिया।

  1. युद्ध के नायक

कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपने साहस से दुश्मन को धूल चटाई और उनका डायलॉग “ये दिल मांगे मोर” आज भी देशभक्ति का प्रतीक है। उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र मिला।

6. परमवीर चक्र विजेता

इस युद्ध में कुल 4 परमवीर चक्र (भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान) दिए गए। जिनमें कैप्टन बत्रा, योगेंद्र सिंह यादव और संजय कुमार जैसे नाम शामिल हैं।

7. भारतीय वायु सेना और बोफ़ोर्स तोपों ने बदला लड़ाई का रुख़

भारत को शुरू में अपने दो मिग विमान और हेलिकॉप्टर खोने पड़े, लेकिन बोफोर्स और भारतीय वायु सेना के तोपों ने पाकिस्तानी स्थानों को बार-बार बुरी तरह से निशाना बनाया। ये हमले इतने भयानक और सटीक थे कि उन्होंने पाकिस्तानी चौकियों को ‘चूरा’ बना दिया,’ नसीम ज़ेहरा ने अपनी पुस्तक ‘फ़्रॉम कारगिल टू द कू’ में लिखा है। पाकिस्तानी सैनिकों बिना किसी सामग्री के लड़ रहे थे और बंदूकों का ढंग से रख-रखाव नहीं होने की वजह से वो बस एक छड़ी बन कर रह गई।
भारतीयों ने मान लिया कि एक छोटे से क्षेत्र पर सैकड़ों तोपों की गोलीबारी ऐसी थी जैसे बड़े हथौड़े से एक अख़रोट को तोड़ दें। लेफ़्टिनेंट जनरल मोहिंदर पुरी, जो कारगिल लड़ाई में कमांडर था, का मानना है कि वायु सेना की कारगिल में सबसे बड़ी भूमिका मनोवैज्ञानिक थी। पाकिस्तानी सैनिक दहल गए और हर ओर भागने लगे जैसे ही भारतीय जेटों की आवाज़ आती।

  1. 527 भारतीय सैनिकों की शहादत इस युद्ध में भारत ने 527 सैनिकों को खोया, लेकिन दुश्मनों से देश की सरहदों को बचाया। उनकी शहादत आज भी हमें प्रेरणा देती है।
  2. दो सबसे प्रमुख लड़ाई के क्षेत्र

कारगिल युद्ध में दो स्थानों पर सबसे अधिक संघर्ष हुआ था। तोलोलिंग और जंगली हिल्स। भारतीय सेना ने बहादुरी से दोनों महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्रों को जीता।

  1. कारगिल युद्ध के खासियत कारगिल युद्ध की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि यह बहुत ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुआ था, जहां तापमान -10 से 20 डिग्री सेल्सियस था।

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