उत्तर प्रदेश

लखनऊ के अलीगंज में भीषण अग्निकांड: कोचिंग सेंटर और गेमिंग ज़ोन वाली इमारत में आग से 15 बच्चों की दर्दनाक मौत, चश्मदीदों ने कहा- देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ एक बहुमंजिला व्यावसायिक इमारत में अचानक भीषण आग लगने के कारण 15 बच्चों की असमय मौत हो गई, जबकि 5 अन्य बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए हैं। राज्य के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि आग की शुरुआत इमारत में संचालित एक कोचिंग सेंटर से हुई थी।

प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर जानवरों की दुकान (पेट शॉप) और कथित तौर पर बेसमेंट में उनका अस्पताल था, वहीं ऊपरी मंजिल पर एक गेमिंग ज़ोन और कोचिंग सेंटर चलाया जा रहा था। आग लगने के बाद चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।

केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमिय अग्रवाल ने मौतों की पुष्टि करते हुए बताया कि अस्पताल में कुल 21 से 22 बच्चों को लाया गया था। इनमें से 15 बच्चों को मृत अवस्था में लाया गया था, जिनके शवों का पंचनामा कर मोर्चरी भेजने की प्रक्रिया जारी है। वहीं घायल 5 बच्चों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है। दो बच्चे इमारत से जान बचाने के लिए नीचे कूद गए थे, जिनकी कमर में गंभीर चोटें आई हैं। उनका सीटी स्कैन कराकर विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उपचार किया जा रहा है।

हादसे के बाद सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने अलीगढ़ के सभी कार्यक्रमों को निरस्त कर तुरंत लखनऊ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों को घायलों के उचित इलाज के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से भी मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया गया है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि सर्च ऑपरेशन पूरा हो चुका है और इमारत में अब कोई भी फंसा नहीं है। घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ऐसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी जो मिसाल बनेगी।

इस हादसे को लेकर स्थानीय निवासियों और चश्मदीदों में भारी आक्रोश देखा गया। चश्मदीद अनुराग ओझा और शशिबाला ने दावा किया कि दमकल विभाग की गाड़ियां सूचना देने के करीब 40 मिनट बाद मौके पर पहुंचीं। अगर फायर ब्रिगेड 5 मिनट और लेट होती तो आसपास की दो अन्य इमारतें भी इसकी चपेट में आ जातीं। चश्मदीदों के अनुसार, जब आग भड़की तो बच्चे खिड़कियों से हाथ निकालकर खुद को बचाने की गुहार लगा रहे थे। लोगों ने पत्थरों से शीशे तोड़कर उन्हें निकालने का प्रयास भी किया, लेकिन तब तक आग विकराल रूप ले चुकी थी।

इस दर्दनाक हादसे पर देश और प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दुख जताते हुए लिखा कि लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुआ यह हादसा बेहद पीड़ादायक है। उन्होंने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इस घटना की ईमानदारी से जांच होनी चाहिए ताकि भविष्य में मासूमों को ऐसे हादसों से बचाया जा सके। उन्होंने सरकार से घायलों के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा प्रबंध करने की मांग की है।

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