बिहारशिक्षा

बगहा में शिक्षा की नई धारा, ‘जय मां बहुरहिया कोचिंग सेंटर’ ने बदली कई घरों की कहानी

टॉपर्स फैक्ट्री बना ‘जय मां बहुरहिया कोचिंग’, छात्राओं ने बढ़ाया क्षेत्र का मान

पश्चिम चंपारण। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बीच भी अगर हौसले मजबूत हों, तो सफलता की राह खुद बन जाती है। पश्चिमी चंपारण के बगहा के मैट्रिक और इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं ने न केवल अपने परिवार और गांव का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे जिले में अपनी अलग पहचान बनाई। इस सपने को साकार करने में “जय मां बहुरहिया कोचिंग सेंटर” ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसकी पहचान आज टॉपर्स फैक्ट्री के तौर पर हो रही है।

“जय मां बहुरहिया कोचिंग सेंटर” में पढ़ने वाले कई छात्र-छात्रों ने परचम लहराया है। बिहार बोर्ड द्वारा जारी मैट्रिक रिजल्ट में अंशिका कुमारी ने 482 अंक लाकर पूरे क्षेत्र में अपना और कोचिंग सेंटर का नाम रोशन किया। अंशिका ने पूरे बिहार में नौवां स्थान प्राप्त किया है। अंशिका के इस सफलता पर पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। कोचिंग सेंटर के शिक्षक प्रिंस पांडेय ने अंशिका को बधाई देते हुए उज्व्वल भविष्य की कामना की।

वहीं, कुछ दिन पहले जारी इंटरमीडिएट रिजल्ट में इस वर्ष पतिलार गांव की श्रेया कुमारी ने 468 अंक (93.8%) हासिल कर जिला स्तर पर पहचान बनाई। इसके साथ ही, संजना प्रवीण (445) और अशमिता रानी (439) जैसे नाम भी मेधा सूची में उभरकर सामने आए। इसके अलावा गुड़िया कुमारी (416), ममता कुमारी (413), लक्की कुमारी (407), खुशी कुमारी (406) और राजमोहन (403) समेत कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया।

यहां के विद्यार्थियों की सफलता के पीछे जहां उनकी मेहनत है, वहीं एक सधे हुए मार्गदर्शन और अनुशासित तैयारी का भी बड़ा योगदान सामने आया है। इन उपलब्धियों के पीछे जिस संस्था की चर्चा छात्रों और अभिभावकों के बीच सबसे ज्यादा हो रही है, वह है “जय मां बहुरहिया कोचिंग सेंटर”। बीते 16 वर्षों से यह संस्थान क्षेत्र में शिक्षा के प्रति गंभीर माहौल तैयार करने का प्रयास करता रहा है। कोचिंग से जुड़े शिक्षक न सिर्फ विषय समझाने तक सीमित रहे, बल्कि उन्होंने छात्रों को लक्ष्य तय करना, समय का सही उपयोग करना और परीक्षा के दबाव को संभालना भी सिखाया। यही कारण है कि कई छात्र, जो शुरुआत में औसत माने जाते थे, उन्होंने भी 300 से अधिक अंक हासिल कर अपनी क्षमता साबित की।

“जय मां बहुरहिया कोचिंग सेंटर” के शिक्षक प्रिंस पांडेय ने श्रेया के बारे में बताया कि वह शुरुआत से ही पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर और संवेदनशील रही है। श्रेया ने जिस आत्मविश्वास के साथ हर विषय पर अपनी पकड़ बनाई थी, वह उसकी सफलता की मुख्य कुंजी है। 

छात्रों का कहना है कि यहां पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहती। नियमित टेस्ट, समयबद्ध सिलेबस, और हर छात्र पर व्यक्तिगत ध्यान, ये कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्होंने उनकी तैयारी को मजबूत बनाया। कमजोर छात्रों के लिए अलग से कक्षाएं और बार-बार दोहराव की व्यवस्था ने उन्हें आत्मविश्वास दिया।

दिलचस्प बात यह है कि इस सफलता ने सिर्फ कुछ छात्रों तक सीमित न रहकर पूरे क्षेत्र में एक सकारात्मक लहर पैदा की है। छोटे बच्चे अब इन्हीं सफल छात्रों को देखकर प्रेरित हो रहे हैं और अपने लक्ष्य को लेकर पहले से अधिक स्पष्ट हैं।

शिक्षा के जानकार मानते हैं कि अगर इसी तरह स्थानीय स्तर पर मार्गदर्शन और संसाधनों का संतुलन बना रहा, तो आने वाले वर्षों में बगहा जैसे इलाके भी शैक्षणिक मानचित्र पर मजबूत पहचान बना सकते हैं।

इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि सही दिशा, अनुशासन और निरंतर प्रयास का संगम हो जाए, तो किसी भी छोटे से कस्बे में बड़ी सफलता की कहानी लिखी जा सकती है।

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