ADG के विवादित बयान पर फूटा चिराग पासवान का गुस्सा,बोले–अपराध रोकने की जगह बहाने बना रही है पुलिस

सासाराम, 18 जुलाई। बिहार में बढ़ते अपराध के मुद्दे पर पुलिस के एडीजी (हेडक्वार्टर और एसटीएफ) कुंदन कृष्णन के हालिया बयान ने राजनीतिक गलियारों में बवाल मचा दिया है। कृष्णन ने बढ़ते अपराध को कृषि चक्र से जोड़ते हुए कहा था कि “अप्रैल, मई, जून में किसानों के पास काम नहीं होता, इसलिए इस दौरान हत्या की घटनाएं ज्यादा होती हैं।” उनके इस बयान ने न केवल विपक्ष बल्कि सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं को भी नाराज़ कर दिया है।
चिराग पासवान ने जताई कड़ी आपत्ति
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, बिहार पुलिस के ADG हेडक्वार्टर कुंदन कृष्णन का बयान अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है। हमारे अन्नदाता किसानों को अपरोक्ष रूप से हत्यारा बताना न सिर्फ उनके मान-सम्मान का अपमान है बल्कि उनके त्याग और परिश्रम का भी अनादर है। अपराधियों पर शिकंजा कसने के बजाय बिहार पुलिस का ध्यान बेवजह के बयानों पर ज्यादा है, जो बेहद चिंताजनक है। प्रशासन को अपनी प्राथमिकता स्पष्ट करनी चाहिए।
चिराग ने यह भी कहा कि सरकार को अपराधियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन पुलिस महकमा भटकाव का शिकार हो गया है।
तेजस्वी यादव का तंज – “पहले बता देते, लोग बिहार छोड़ देते”
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी एडीजी के बयान पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, अगर एडीजी को ये सब पहले से पता था तो जनता को सचेत कर देते, लोग बिहार छोड़कर बाहर चले जाते। कम से कम जान तो बच जाती। अब अपराध पर बयान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।”
तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब पुलिस खुद मान रही है कि उन्हें पता है कब अपराध बढ़ेगा, तो फिर वे रोकथाम के लिए तैयारी क्यों नहीं करते? प्रशांत किशोर का हमला – “कुंदन कृष्णन को आंख की जांच करानी चाहिए” जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बयान को “सरकार और अधिकारियों की मानसिक दिवालियापन” करार दिया।
उन्होंने कहा, अगर ADG को लगता है कि अपराधी किसान हैं, तो फिर उन्हें पारस अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज देखकर समझ लेना चाहिए कि अपराधी जींस-शर्ट पहने लोग थे, न कि खेत में काम करने वाले किसान। उन्हें अपनी आंखों की जांच करानी चाहिए।” प्रशांत किशोर ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे गैर-जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
क्या है पूरा विवाद?
बिहार के एडीजी कुंदन कृष्णन ने बयान दिया कि किसानों के खाली रहने के महीनों में अपराध की घटनाएं ज्यादा होती हैं। इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया। राज्य के भीतर पहले से ही कानून व्यवस्था को लेकर असंतोष है, खासकर पटना में पारस हॉस्पिटल जैसी घटनाओं के बाद, जहां अपराधी खुलेआम गोलीबारी कर रहे हैं।




