क्या बिना UGC-NET के बन सकते हैं असिस्टेंट प्रोफेसर, जानिए यूजीसी के नए नियम

UGC NET जून 2025 का परिणाम जारी हो चुका है। इस परीक्षा में हज़ारों अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की है, लेकिन कुछ अभ्यर्थियों को दोबारा प्रयास करना होगा। परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थी अब जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए आवेदन कर सकते हैं और देश भर की विश्वविद्यालयों में पीएचडी में एडमिशन और असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए भी आवेदन कर सकते हैं। लेकिन इस बीच, असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए UGC-NET पास करना क्या आवश्यक है
यूजीसी के नए नियमों में क्या कहा गया है
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 2025 में शिक्षक भर्ती और प्रमोशन के नियमों का एक नया मसौदा जारी किया है। अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए NET पास करना आवश्यक नहीं है। यानी NET के अलावा कुछ अतिरिक्त योग्यताएं भी इस पद के लिए योग्य हो सकती हैं।
नेट पास किए बिना भी इन विशेषज्ञों को मिल सकता है प्रोफेसर बनने का मौका
जनवरी 2025 में, यूसीसी ने शिक्षकों की नियुक्ति में कुछ बदलाव किए। इन बदलावों में यूजीसी ने बिना नेट पास किए हुए ही एक्सपर्ट्स की बतौर प्रोफेसर नियुक्ति के नियम बनाए हैं। ये नियम योग, संगीत, प्रदर्शन कला, दृश्य कला, मूर्तिकला और नाटक के आठ क्षेत्रों में एक्सपर्ट्स को उनके अनुभव के आधार पर नियुक्त करते हैं।
जैसे, इन क्षेत्रों में अनुभवी लोगों को यूजीसी नेट पास किए बिना असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति मिल सकती है अगर उन्होंने ग्रेजुएशन के साथ अपने क्षेत्र में पांच साल का अनुभव किया है। इसी तरह, एक्सपर्ट एसोसिएट प्रोफेसर 10 वर्ष और
एक्सपर्ट प्रोफेसर 15 वर्ष का अनुभव होगा।
ये क्षेत्र भी बिना नेट पास नियुक्ति यूजीसी की नई दिशा-निर्देशों के अनुसार, मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग या मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी डिग्री रखने वाले व्यक्ति भी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के पात्र होंगे, चाहे वे यूजीसी नेट से नहीं जुड़े हों। यूजीसी की नई दिशा-निर्देशों के अनुसार, मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग या मास्टर ऑफ टेक्नोलॉजी डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थी यूनिवर्सिटी या संबंधित कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए पात्र होंगे।
यूजीसी ने कुलपति चुनाव के नियम भी बदले हैं
यूसीसी ने इसके साथ ही विश्वविद्यालयों के कुलपति चुनाव के नियमों में भी बदलाव किए। कुलपति की नियुक्ति पहले अकादमिक और शैक्षणिक योग्यता पर निर्भर करती थी, लेकिन यूजीसी के नए नियमों के अनुसार, उद्योग, लोक प्रशासन, पब्लिक पॉलिसी और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग (PSU) के विशेषज्ञों को भी नियुक्ति दी जा सकती है। इसके लिए 70 वर्ष की उम्र सीमा निर्धारित की गई है।




