बगहा में यूरिया की किल्लत से भड़के किसान, एनएच 727 पर लगाया लंबा जाम, फसलों पर मंडराया संकट
बगहा (पश्चिम चंपारण)। बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा अनुमंडल में इन दिनों किसान दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ भीषण गर्मी और सूखे ने खेतों को सुखा दिया है, तो दूसरी तरफ धान और गन्ने की फसल के लिए बेहद जरूरी यूरिया खाद की भारी किल्लत ने उनकी कमर तोड़ दी है। खाद न मिलने से आक्रोशित किसानों का धैर्य आखिरकार जवाब दे गया और उन्होंने मंगलवार को उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-727) को पटखौली के पास पूरी तरह जाम कर दिया। इस दौरान किसानों ने प्रशासन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
बगहा में यूरिया की किल्लत: सूख रहे बिचड़े और खेतों में पड़ी दरारें
मानसूनी बारिश में देरी के कारण इलाके में लगभग 30 प्रतिशत धान के बिचड़े पहले ही सूख चुके हैं और खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। गन्ने की फसल भी मिट्टी कड़ी होने के कारण कोड़ाई न होने से झुलस रही है। स्थानीय किसान सुदर्शन पटेल ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि पहले हम सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे थे और अब जब खाद की सख्त जरूरत है, तो वह भी नसीब नहीं हो रही है। अगर समय रहते यूरिया की आपूर्ति नहीं हुई, तो धान और गन्ना दोनों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी।
चप्पल और हेलमेट के भरोसे लग रही कतारें
बगहा-दो स्थित बिस्कोमान केंद्र पर हालात बेहद निराशाजनक हैं। खाद पाने के लिए किसान रात के दो बजे से ही लाइनों में लग रहे हैं। अपनी जगह सुरक्षित रखने के लिए किसान कतारों में अपनी चप्पलें, हेलमेट और पत्थर रखकर इंबगहा में यूरिया की किल्लत, NH 727 जाम करने को मजबूर हैं। इसके बावजूद स्टॉक सीमित होने के कारण सैकड़ों किसानों को हर दिन मायूस होकर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
सरकारी रेट दरकिनार, ऊंचे दामों पर बिक्री का आरोप
यूरिया का आधिकारिक सरकारी रेट प्रति बोरा 267 रुपये तय है, लेकिन किसानों का आरोप है कि उनसे 330 रुपये से लेकर 500 रुपये तक की मनमानी वसूली की जा रही है। इसके साथ ही दुकानदारों द्वारा नैनो यूरिया खरीदने का दबाव भी बनाया जा रहा है। सिंगाड़ी पिपरिया में इसी मूल्य वृद्धि को लेकर दुकानदारों और किसानों के बीच तीखी नोकझोंक और भारी हंगामा भी देखने को मिला।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद खुला राष्ट्रीय राजमार्ग
सड़क जाम होने की वजह से नेशनल हाईवे पर एम्बुलेंस, स्कूल वैन और सैकड़ों यात्री गाड़ियां घंटों फंसी रहीं। हंगामे की सूचना मिलते ही बगहा के अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और स्थानीय पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित किसानों को काफी समझा-बुझाकर और जल्द ही खाद की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन देकर करीब दो घंटे बाद जाम खुलवाया। हालांकि, किसानों का कहना है कि प्रशासन हर साल केवल खोखले वादे करता है, धरातल पर समय से समाधान कभी नहीं मिलता।
अधिकारियों के दावे बनाम जनप्रतिनिधियों की मांग
इस पूरे संकट पर जिला कृषि पदाधिकारी का तर्क है कि जिले में यूरिया की कोई कमी नहीं है और वर्तमान में 13,845 मीट्रिक टन यूरिया का स्टॉक उपलब्ध है। कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए बिस्कोमान केंद्रों पर प्रतिदिन 10 बोरा और खुदरा दुकानों पर 5 बोरा बिक्री की अधिकतम सीमा तय की गई है। वहीं दूसरी तरफ, वाल्मीकिनगर के विधायक सुरेन्द्र प्रसाद ने इस प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग की है, क्योंकि गन्ने की फसल को इस समय सबसे अधिक यूरिया की आवश्यकता होती है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वाल्मीकिनगर के सांसद सुनील कुमार ने भी केंद्रीय रसायन मंत्रालय से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है।
बगहा में यूरिया की किल्लत: किसान यहां दर्ज करा सकते हैं अपनी शिकायत
यदि किसी किसान को यूरिया की किल्लत, अनुपलब्धता या कालाबाजारी से जुड़ी कोई समस्या है, तो वे सीधे बगहा अनुमंडल कृषि पदाधिकारी के मोबाइल नंबर 8340456058 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
गौरतलब है कि यूरिया संकट और कालाबाजारी का यह हाल सिर्फ बगहा का नहीं बल्कि पूरे बिहार का है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने अब अवैध वसूली और जमाखोरी करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कई जिलों में एफआईआर दर्ज की है और उनके लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू कर दी है।



