उत्तर प्रदेश

यूपी में कम बारिश की आशंका: सीएम योगी ने संभाली कमान, जल संकट रोकने के लिए विभागों को दिए सख्त निर्देश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस साल मानसून की सुस्त रफ्तार और सामान्य से कम बारिश के अनुमान ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2026 में सूखे जैसे हालात या पेयजल संकट की स्थिति से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अमले को पूरी तरह मुस्तैद कर दिया है। एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य के किसी भी कोने में पानी की किल्लत नहीं होनी चाहिए। इसके लिए उन्होंने सभी संबंधित महकमों को समय रहते एक मजबूत और प्रभावी कार्ययोजना लागू करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पानी बचाना सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसे आम जनता की भागीदारी के साथ एक बड़े जनआंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कैच द रेन’ यानी वर्षा जल संचयन अभियान को गांव-गांव और शहर-शहर तक पूरी ताकत से पहुंचाने की बात कही, ताकि आने वाले समय में पानी के संकट से बचा जा सके।

मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों ही क्षेत्रों में जून से सितंबर तक औसत से कम बरसात होने के आसार हैं। इसके साथ ही जून के महीने में गर्मी का प्रकोप भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने वक्त रहते अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

इस संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री ने सिंचाई, पंचायती राज, भूगर्भ जल, राजस्व, कृषि और नमामि गंगे जैसे प्रमुख विभागों को आपस में बेहतर तालमेल बिठाकर काम करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी की सप्लाई पर कोई आंच नहीं आनी चाहिए और किसानों को खेतों की सिंचाई में कोई रुकावट न हो। इसके अलावा, गांवों के तालाबों और जलाशयों को प्रदूषण से बचाने तथा ‘अमृत सरोवरों’ की नियमित साफ-सफाई करने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि उनकी जल भंडारण क्षमता बनी रहे।

बैठक में राहत देने वाली एक बात यह सामने आई कि पिछले कुछ सालों में उत्तर प्रदेश के भूजल स्तर में काफी सुधार हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि साल 2013 में राज्य के 113 विकासखंड डार्क जोन यानी अतिदोहित श्रेणी में थे, जिनकी संख्या साल 2025 तक घटकर केवल 44 रह गई है। इसके साथ ही प्रदेश का सालाना भूजल रिचार्ज जो साल 2017 में लगभग 30.59 लाख करोड़ लीटर था, वह साल 2025 में बढ़कर 35.79 लाख करोड़ लीटर हो चुका है। सरकार भूजल दोहन की दर को 70 फीसदी के दायरे में रखने में भी कामयाब रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंत में कहा कि बदलती जलवायु और मौसम के मिजाज को देखते हुए जल संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने अधिकारियों को मानसून की पल-पल की गतिविधि पर नजर रखने और हर अभियान की जमीनी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग करने की हिदायत दी है, ताकि प्रदेश को किसी भी संभावित संकट से सुरक्षित रखा जा सके।

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