दिल्ली

नीट यूजी री-एग्जाम: सुरक्षा के चक्रव्यूह में हुई परीक्षा, परीक्षार्थियों के लिए पीएम मोदी ने रोका अपना काफिला

नई दिल्ली। देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी की पुनर्परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और नकल विहीन माहौल में संपन्न कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने इस बार सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए। बीते दिनों सामने आईं गड़बड़ियों से सबक लेते हुए इस बार सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने परीक्षा केंद्रों को एक अभेद्य किले में तब्दील कर दिया था। राजस्थान समेत देश के कई संवेदनशील राज्यों में सुबह से ही खुफिया विभाग और पुलिस की टीमें जमीन पर मुस्तैद नजर आईं।

नकल माफियाओं और पेपर लीक के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए परीक्षा केंद्रों के आसपास की फोटोकॉपी की दुकानों, साइबर कैफे और कंप्यूटर सेंटरों को परीक्षा समाप्त होने तक बंद रखने का कड़ा आदेश दिया गया था। प्रशासन ने केंद्रों के चारों तरफ 300 मीटर के दायरे में धारा 144 की तरह पाबंदी लागू कर दी थी, जिससे बेवजह भीड़ जमा न हो सके। भारी पुलिस बल के साथ-साथ उड़नदस्तों और महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी, जो हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रख रहे थे। अभिभावकों को भी परीक्षा केंद्रों से एक निश्चित दूरी पर ही रोक दिया गया था।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने इस बार सुरक्षा को हाईटेक बनाते हुए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। परीक्षा हॉल में प्रवेश से पहले हर छात्र का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन किया गया। एडमिट कार्ड और मूल पहचान पत्रों की कई स्तरों पर बारीकी से जांच हुई। पूरे परीक्षा केंद्र को हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रखा गया था। मोबाइल, स्मार्टवॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को रोकने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया गया।

इस कड़े प्रशासनिक पहरे के बीच राजधानी दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बेहद संवेदनशील पहल भी सामने आई। दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री ने छात्रों की सुविधा के लिए अपने काफिले को करीब 45 मिनट तक रोके रखा। दरअसल, दोपहर सवा एक बजे जब पीएम दिल्ली पहुंचे, तब बड़ी संख्या में छात्र परीक्षा केंद्रों की ओर बढ़ रहे थे। वीवीआईपी मूवमेंट के कारण सड़कों पर ट्रैफिक जाम न लगे और किसी भी छात्र की परीक्षा न छूटे, इसके मद्देनजर प्रधानमंत्री ने परीक्षा शुरू होने के बाद ही अपना काफिला आगे बढ़ाने का फैसला किया। प्रधानमंत्री के इस संवेदनशील कदम की छात्रों और अभिभावकों द्वारा काफी सराहना की जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, देश की इस सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा की विश्वसनीयता और शुचिता को बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। किसी भी आपात स्थिति या गड़बड़ी की सूचना पर तुरंत एक्शन लेने के लिए क्विक रिस्पांस टीमें भी बैकअप में रखी गई थीं। लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा को बिना किसी विवाद के शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना शिक्षा व्यवस्था में छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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