बक्सर में शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने निजी स्कूल संचालकों के साथ की समीक्षा बैठक

बक्सर में शिक्षा के भविष्य को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और गंभीर बैठक संपन्न हुई है, जो इस क्षेत्र में बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। शहर के होटल वैष्णवी क्लार्क में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में बिहार के शिक्षा मंत्री मिथलेश तिवारी ने निजी विद्यालयों के निदेशकों और प्राचार्यों के साथ सीधा संवाद किया। इस चर्चा के दौरान कई ऐसे महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए, जो आने वाले समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा दे सकते हैं।
इस सीधी बातचीत की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को केवल कागजों तक सीमित न रखकर जमीनी स्तर पर लागू करने पर गहन मंथन हुआ। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आज के समय में छात्र-केंद्रित शिक्षण और आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षा बेहद जरूरी है। सरकार का यह रुख साफ करता है कि वह नीतियां बनाने के साथ-साथ उनके सही क्रियान्वयन को लेकर भी पूरी तरह गंभीर है।
चर्चा का एक अन्य प्रमुख पहलू विद्यार्थियों का समग्र विकास रहा। वर्तमान दौर में केवल किताबी ज्ञान या अंकों की होड़ से अलग हटकर बच्चों में नैतिक मूल्य, मजबूत व्यक्तित्व और संस्कारों के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई। संवाद के दौरान स्कूलों को राष्ट्र निर्माण की असली प्रयोगशाला के रूप में देखा गया। शिक्षा मंत्री ने इस बात को रेखांकित किया कि बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकारी और निजी संस्थानों के बीच एक मजबूत साझेदारी का होना अनिवार्य है। जहां निजी विद्यालय शिक्षा में नए प्रयोग और नवाचार लेकर आते हैं, वहीं सरकार उन्हें सही दिशा देने का काम करती है।
इस पूरे संवाद का सबसे प्रभावशाली संदेश यह निकलकर आया कि विद्यालय केवल अक्षर ज्ञान के केंद्र नहीं हैं, बल्कि ये संस्कार और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला हैं। विकसित बिहार और सशक्त भारत का जो सपना हम देख रहे हैं, उसकी शुरुआत वास्तव में इन्हीं क्लासरूम से होती है। जानकारों का मानना है कि यदि इस तरह के संवाद नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो शिक्षा व्यवस्था में बड़े और सकारात्मक जमीनी बदलाव देखने को मिलेंगे। इस विज़न को साकार करने में निजी स्कूलों के निदेशकों और प्राचार्यों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
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