बेतिया में जनसमस्याओं के निवारण के लिए सहयोग शिविर का शानदार आगाज, 30 दिनों में होगा हर शिकायत का निपटारा
वार्ड नंबर सात स्थित मिशन मिडिल स्कूल परिसर में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसका विधिवत उद्घाटन बेतिया की महापौर गरिमा देवी सिकारिया और नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित ने संयुक्त रूप से किया।
बेतिया। आम जनता की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के लिए बेतिया नगर निगम क्षेत्र में एक नई और प्रभावशाली पहल की शुरुआत हुई है। मंगलवार को नगर निगम के वार्ड संख्या एक से सात तक में जनसमस्या निवारण के उद्देश्य से सहयोग शिविर लगाए गए। वार्ड नंबर सात स्थित मिशन मिडिल स्कूल परिसर में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसका विधिवत उद्घाटन बेतिया की महापौर गरिमा देवी सिकारिया और नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित ने संयुक्त रूप से किया।
सहयोग शिविर बेतिया: इस अवसर पर महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने राज्य सरकार की इस योजना की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह योजना उन आम नागरिकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, जो उचित जानकारी के अभाव में अपनी शिकायतें सही जगह तक नहीं पहुंचा पाते थे और सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर थे। अब सहयोग पोर्टल के माध्यम से लोग घर बैठे अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं। साथ ही इस शिविर का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार की विभिन्न लाभकारी योजनाओं की जानकारी आम जनमानस तक पहुंचाना भी है।
सहयोग शिविर बेतिया: महापौर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार द्वारा शिकायतों और सुझावों के समाधान के लिए अधिकतम 30 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई है। इस तय समय सीमा के भीतर समस्याओं का निपटारा होने से पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और लोगों को दफ्तरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि वे इन शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपनी समस्याएं व सुझाव बेझिझक यहां दर्ज कराएं।
कार्यक्रम में मौजूद नगर आयुक्त शिवाक्षी दीक्षित ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार अब से हर महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को सभी वार्डों में अनिवार्य रूप से ऐसे सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने, प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़े काम, टैक्स वसूली, साफ-सफाई से जुड़ी शिकायतें और अन्य जनोपयोगी सेवाओं का सीधा लाभ जनता को उनके वार्ड में ही मिलेगा।
नगर निगम के इस कदम की स्थानीय लोगों द्वारा काफी प्रशंसा की जा रही है। इसे जनसुनवाई को आसान बनाने और जमीनी स्तर पर सुशासन स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।



