यूरिया की किल्लत और कालाबाजारी से परेशान किसान, महंगे दाम पर खरीदने को मजबूर

बेतिया। बेतिया जिले में इन दिनों यूरिया की भारी किल्लत और कालाबाजारी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। धान की रोपाई के बाद यूरिया की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, लेकिन जिले में न तो सरकारी दुकानों पर और न ही निजी दुकानों पर खाद की समुचित आपूर्ति हो रही है। इससे किसानों को मजबूरी में महंगे दामों पर यूरिया खरीदना पड़ रहा है या फिर खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि किसान अब भारत-नेपाल सीमा के पास इनरवा जैसे इलाकों से यूरिया लाने को विवश हो गए हैं। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के किसान दुकानों पर यूरिया की तलाश में भटकते नजर आ रहे हैं। कई दुकानों पर खाद उपलब्ध नहीं है, और जहां मिल भी रही है, वहां उसे निर्धारित सरकारी दर से कहीं अधिक कीमत पर बेचा जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्र के कुछ खुदरा खाद दुकानदारों का कहना है कि जिले के बड़े थोक विक्रेता, जो खाद आपूर्ति के प्रमुख स्रोत हैं, जानबूझ कर छोटे दुकानदारों को यूरिया नहीं दे रहे हैं। इसके पीछे मुनाफाखोरी की मंशा बताई जा रही है। आरोप है कि थोक व्यापारी माफिया खुदरा दुकानदारों को 300 रुपये प्रति बोरी की दर से यूरिया दे रहे हैं, जबकि सरकारी आदेशानुसार यह थोक में ₹251 और खुदरा बिक्री के लिए अधिकतम ₹266.50 में बिकनी चाहिए।
इस अनुचित मूल्यवृद्धि से न केवल खुदरा दुकानदारों को नुकसान हो रहा है, बल्कि सबसे अधिक मार किसानों पर पड़ रही है, जो पहले ही महंगाई और खेती की अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द इस कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए और यूरिया की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, ताकि फसल उत्पादन पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।




