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संसद से जंतर-मंतर तक: INDIA ब्लॉक की अहम बैठक की इनसाइड स्टोरी

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही इसके हंगामेदार होने के संकेत मिल रहे हैं। दरअसल, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की एक अहम ऑनलाइन बैठक आयोजित हुई। मंगलवार को हुई इस बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), समाजवादी पार्टी (SP), शिवसेना (UBT), माकपा, भाकपा, झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), एनसीपी (SP), भाकपा (माले), फॉरवर्ड ब्लॉक, केरल कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) समेत कुल 24 दलों ने हिस्सा लिया।


इसमें संसद में एकजुट रणनीति बनाने के साथ-साथ सड़क पर भी विरोध की रूपरेखा तय कर दी गई। बैठक की इनसाइड स्टोरी सामने आई है।

सरकार से संसद में तीखे प्रश्न वास्तव में, इस बैठक में निर्णय हुआ कि विपक्ष एकजुट होकर सरकार से कठोर प्रश्न पूछेगा। विपक्ष ने आठ प्रमुख मुद्दे उठाए हैं: पहलगाम हमला, ऑपरेशन सिंदूर, ट्रंप का सीजफायर दावा, बिहार में SIR मतदाता सूची में संशोधन, परिसीमन, जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा, महिलाओं पर अत्याचार और बेरोजगारी। कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं और एयर इंडिया विमान हादसे पर भी चर्चा की है।

सभी 24 दल सहमत हुए


सभी 24 दलों ने बैठक में चर्चा की कि पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सेना की वीरता की प्रशंसा की जाएगी। लेकिन साथ ही प्रधानमंत्री से इन मुद्दों पर प्रतिक्रिया भी मांगी जाएगी। सरकार को ट्रंप के रूस-यूक्रेन युद्ध में दखल देने जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी नीतिगत स्पष्टीकरण की जरूरत होगी।

विपक्षी एकता की खुलकर वकालत


कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी भी बैठक में मौजूद थीं। राहुल गांधी भी फ्रेम में दिखाई दिए। सोनिया ने हालांकि सार्वजनिक भाषण नहीं दिया। यह INDIA गठबंधन की 2024 लोकसभा चुनाव के बाद पहली बैठक थी जिसमें टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी भी शामिल हुए। उन्होंने विपक्षी एकता की खुलकर वकालत की। Abhishek Banerjee ने कहा कि TMC विपक्ष के हर आम मुद्दे पर सहमत है और चुनाव आयोग और ED के दुरुपयोग का विरोध करेगी। पेगासस जासूसी मामले को भी उन्होंने फिर से उठाया और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया। आम आदमी पार्टी को बैठक में नहीं बुलाया गया था और उनकी अनुपस्थित पर भी कोई चर्चा नहीं हुई।

जंतर-मंतर तक मार्च: सूत्रों ने बताया कि इंडिया ब्लॉक 23 और 24 जुलाई को संसद से जंतर-मंतर तक मार्च कर सकता है। SIR मार्च बिहार की मतदाता सूची में बदलाव के खिलाफ यह विरोध करेगा। विपक्ष इसे भाजपा की चाल बता रहा है। अब देखना होगा कि यह रणनीति सरकार पर कितना दबाव डाल सकती है, चाहे संसद के भीतर हो या बाहर।

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