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पूर्वी चंपारण की अफसर बिटिया रागिनी बनीं रामनगर की पहली महिला SDPO, सफलता की कहानी उन्हीं की जुबानी

Ragini Kumari:“कौन कहता है कि आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों…” इस मशहूर पंक्ति को चरितार्थ कर दिखाया है बिहार के पूर्वी चंपारण जिले की बेटी रागिनी कुमारी ने। अपनी लगन, संघर्ष और अथक मेहनत के बल पर उन्होंने न सिर्फ डीएसपी बनकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की, बल्कि पश्चिम चंपारण के रामनगर की पहली महिला SDPO बनने का गौरव भी प्राप्त किया है।

बचपन की जिद्द बनी मंजिल की चाबी

रागिनी बचपन से ही जिद्दी स्वभाव की थीं। पढ़ाई के प्रति विशेष लगाव और अफसर बनने की पक्की जिद ही उन्हें इस मुकाम तक लाई। उन्होंने बताया, “बचपन में जो सपना देखा था, आज वो हकीकत में बदल चुका है।”

साधारण परिवार से आने वाली रागिनी के पिताजी एक सरकारी शिक्षक हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के सरकारी स्कूल में हुई और स्नातक की पढ़ाई मोतिहारी के एम.एस. कॉलेज से की।

बीपीएससी में दोहरी सफलता

रागिनी ने 64वीं बीपीएससी परीक्षा में सफलता पाकर पहले राजस्व पदाधिकारी (CO) पद पर कार्य किया। उनकी पहली पोस्टिंग सुपौल जिले के छातापुर में हुई, लेकिन दिल में पुलिस सेवा की चाह अभी भी बाकी थी। फिर उन्होंने दोबारा प्रयास किया और 65वीं बीपीएससी में डीएसपी पद के लिए चयनित हुईं। मुंगेर में ट्रेनिंग और सिवान में मुख्यालय डीएसपी के रूप में कार्य का अनुभव लेकर अब उन्हें रामनगर अनुमंडल का एसडीपीओ नियुक्त किया गया है।

रामनगर की संवेदनशील जिम्मेदारी

रागिनी कुमारी को एक ऐसा इलाका सौंपा गया है जो नेपाल सीमा, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व, जंगल और ग्रामीण क्षेत्रों से घिरा हुआ है। उन्होंने कहा —

“रामनगर संवेदनशील क्षेत्र है। आने वाले विधानसभा चुनाव में विधि व्यवस्था बनाये रखना सबसे बड़ी चुनौती है, लेकिन मेरी पहली प्राथमिकता कानून का पालन और अपराध मुक्त समाज बनाना है।”

वह लंबित मामलों के निष्पादन, कुर्की-जब्ती, और वारंटियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार अभियान चला रही हैं। “अपराधियों को किसी भी सूरत में छूट नहीं मिलेगी। बगहा पुलिस उनके लिए यमराज की तरह कार्रवाई करेगी।”

प्रेम, विवाह और साझी सेवा की कहानी

रागिनी की सफलता सिर्फ अफसर बनने तक सीमित नहीं है। उनकी जिंदगी में एक खूबसूरत मोड़ तब आया जब छातापुर में कार्यरत रहते हुए उनकी मुलाकात अंचलाधिकारी विवेक दीप से हुई। वहीं से शुरू हुई प्रेम कहानी शादी में तब्दील हुई। दिलचस्प बात ये है कि विवेक दीप भी डीएसपी हैं और वर्तमान में बेतिया में एसडीपीओ के पद पर कार्यरत हैं।

रागिनी कहती हैं, “विवेक मेरे सीनियर हैं। उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। किसी भी परेशानी या केस में उनकी सलाह मेरे लिए अमूल्य होती है।”

एक अफसर, एक पत्नी, एक गृहिणी – हर भूमिका में श्रेष्ठ

रागिनी न सिर्फ एक सख्त और ईमानदार पुलिस अफसर हैं, बल्कि एक कुशल गृहिणी और समर्पित पत्नी भी हैं। उनका मानना है कि “एक लड़की सब कुछ कर सकती है – बस उसे अपने सपनों पर भरोसा होना चाहिए।”

संदेश उन बेटियों के लिए

रागिनी की सफलता, साधारण पृष्ठभूमि से आई हर बेटी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित कर दिखाया कि सपने छोटे गांवों में भी जन्म लेते हैं। अगर हौसले बुलंद हों, तो रास्ते खुद-ब-खुद बनते जाते हैं। पढ़ाई, परिश्रम और आत्मविश्वास ही असली हथियार हैं। रागिनी कुमारी आज एक मिसाल हैं- चंपारण की, बिहार की और पूरे देश की बेटियों के लिए।

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