अजमेर मेयर चुनाव में बड़ा उलटफेर: क्रॉस वोटिंग से पलटा पाला, कांग्रेस को पटखनी देकर बीजेपी ने जमाया कब्जा
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों के परिणामों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजनीति में अंतिम समय तक कुछ भी निश्चित नहीं होता है। अजमेर नगर निगम चुनाव (Ajmer Mayor Election) में एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला है, जहां आंकड़ों के गणित को ध्रुवीकरण और बगावत ने पूरी तरह से पलट कर रख दिया। मजबूत संख्याबल का दावा करने वाली कांग्रेस पार्टी को भीतरघात और क्रॉस वोटिंग का भारी खामियाजा भुगतना पड़ा, जबकि विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने रणनीतिक बाजी पलटते हुए महापौर पद पर शानदार जीत हासिल कर ली है।
क्या था सदन का गणित और कैसे पलटी बाजी?
अजमेर नगर निगम के कुल 80 वार्डों के चुनावी परिणामों पर यदि नजर डालें, तो चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण कांग्रेस के पक्ष में अधिक झुके हुए प्रतीत हो रहे थे।
- दलों की स्थिति: सदन की कुल 80 सीटों में से मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के पास 37 पार्षद थे, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 32 पार्षद जीतकर आए थे। इसके अलावा, 11 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी, जो इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभाने के लिए तैयार बैठे थे।
- बहुमत का जादुई आंकड़ा: किसी भी दल को अपना मेयर जिताने के लिए सदन में कम से कम 41 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी। संख्याबल के लिहाज से कांग्रेस पार्टी बहुमत के आंकड़े से मात्र कुछ ही कदम दूर थी और उसे निर्दलों के समर्थन की आस थी।
- भीतरघात और क्रॉस वोटिंग: मतदान के दिन जो कुछ हुआ, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया। गुप्त मतदान (Secret Ballot) प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस खेमे में बड़ी सेंधमारी देखने को मिली। पार्टी के कई पार्षदों ने कथित तौर पर क्रॉस वोटिंग करते हुए पाला बदल लिया।
बीजेपी की रणनीतिक जीत और कांग्रेस में मायूसी
पार्षदों की इस बगावत का सीधा और त्वरित फायदा भारतीय जनता पार्टी को मिला। बीजेपी के रणनीतिकारों ने अंतिम पलों में निर्दलीय पार्षदों और असंतुष्ट पार्षदों को अपने पाले में करने में सफलता हासिल कर ली। जैसे ही चुनाव परिणाम घोषित हुए, स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस के अंदरूनी कलह और बगावत ने उसकी जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
अजमेर में इस हार के बाद से कांग्रेस पार्टी के भीतर आंतरिक कलह और नेतृत्व की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। दूसरी ओर, अजमेर जिला मुख्यालय पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने इस नाटकीय और ऐतिहासिक जीत का जश्न आतिशबाजी कर और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर मनाया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों में इस प्रकार का क्रॉस वोटिंग ट्रेंड इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर पार्षदों की निष्ठा और स्थानीय समीकरण कई बार बड़े राजनीतिक दलों के केंद्रीय दावों पर भारी पड़ जाते हैं। इस जीत से राजस्थान की राजनीति में आगामी अन्य निगम चुनावों के लिए भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।