भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा और चौकसी बढ़ाने के कड़े निर्देश, डीएम तरनजोत सिंह ने की समीक्षा बैठक

पश्चिमी चंपारण के बेतिया में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने और अवैध गतिविधियों को पूरी तरह ठप करने के लिए प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। मंगलवार को समाहरणालय सभागार में जिला पदाधिकारी (डीएम) तरनजोत सिंह की अध्यक्षता में जिलास्तरीय एनसीओआरडी (NCORD) और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में सीमावर्ती इलाकों में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर करने पर गहन मंथन हुआ।
बैठक के दौरान नो-मैन्स लैंड पर अवैध कब्जों को हटाने, फर्जी पहचान पत्रों की कड़ाई से जांच करने और दोहरी नागरिकता से जुड़े संदिग्ध मामलों पर नकेल कसने की रणनीति बनाई गई। इसके साथ ही, सीमा पार से होने वाली जाली नोटों की तस्करी, साइबर अपराध, अवैध टेलीकॉम गतिविधियों, म्यूल बैंक खातों और संदिग्ध आर्थिक लेन-देन पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए गए। डीएम ने गायब या क्षतिग्रस्त हो चुके सीमा पिलरों को दोबारा स्थापित करने और मरम्मत कार्य में तेजी लाने की बात कही।
जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सीमा सुरक्षा और राष्ट्र की संप्रभुता सर्वोपरि है। उन्होंने निर्देश दिया कि संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए और सुरक्षा एजेंसियां आपस में रियल-टाइम इनपुट साझा करें ताकि किसी भी संदिग्ध हलचल पर तुरंत एक्शन लिया जा सके। इसके अलावा, सीमावर्ती गांवों के विकास के लिए ‘वाइब्रेंट विलेजेज प्रोग्राम’ के तहत चल रही योजनाओं को रफ्तार देने पर जोर दिया गया, ताकि विकास का लाभ हर नागरिक तक पहुंचे।
इस बैठक में बेतिया के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कुमार गौतम, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वन प्रमंडल पदाधिकारी, सशस्त्र सीमा बल (SSB) की 21वीं, 44वीं, 65वीं और 47वीं वाहिनी के कमांडेंट, सिविल सर्जन और बीएसएनएल के अधिकारी मौजूद रहे। वहीं, बगहा के पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस रणनीति समीक्षा में शामिल हुए।
बगहा में मौत का रहस्य: ट्रैक्टर पलटने से गई जान या एक करोड़ की जमीन के लिए रची गई खूनी साजिश?



