मोदी मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की सुगबुगाहट: कई मंत्रियों की हो सकती है छुट्टी, सहयोगियों को मिलेगी तरजीह

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के पहले बड़े मंत्रिपरिषद विस्तार और फेरबदल की तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच चुकी हैं। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों और सांगठनिक संतुलन को साधने के लिए इस कवायद को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से हुई हालिया मुलाकात के बाद इस फेरबदल की संभावनाओं को और बल मिल गया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि आने वाले कुछ ही दिनों में एक दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है या उन्हें मंत्रिमंडल से मुक्त किया जा सकता है।
कैबिनेट से कुछ चेहरों की विदाई तय
रणनीतिक बदलावों के तहत सरकार से कम से कम दो कैबिनेट मंत्रियों और तीन राज्य मंत्रियों की छुट्टी होने के संकेत हैं। जॉर्ज कुरियन पहले ही मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे चुके हैं, जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। वहीं, पंजाब विधानसभा चुनावों में भाजपा को मजबूती देने के लिए केंद्रीय रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके अलावा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संगठनात्मक फेरबदल के कारण पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा को क्रमशः यूपी और दिल्ली भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया है, जिसके बाद उनके स्थान पर नए चेहरों को मंत्री बनने का मौका मिलेगा।
एनडीए के साथी दलों को मिलेगा बड़ा प्रतिनिधित्व
इस बार के विस्तार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दलों की हिस्सेदारी बढ़ने की पूरी उम्मीद है। जनता दल यूनाइटेड, तेलुगु देशम पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रीय लोक मोर्चा जैसी पार्टियों को मंत्रिपरिषद में जगह दी जा सकती है। इनमें से जदयू और टीडीपी को उनके कद के मुताबिक बड़ी हिस्सेदारी मिलने की चर्चा है। अधिकांश सहयोगी नेताओं को राज्य मंत्री का पद मिल सकता है, जबकि एक-दो बड़े नेताओं को सीधे कैबिनेट में एंट्री दी जा सकती है। बिहार के क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मानव संसाधन और नागरिक उड्डयन जैसे विभागों में राज्य मंत्री के पद सहयोगियों को दिए जा सकते हैं।
युवाओं को मौका और उम्रदराज मंत्रियों की संगठन में वापसी
भाजपा नेतृत्व इस बार मंत्रिमंडल में युवाओं को तरजीह देने की रणनीति पर काम कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, जिन मंत्रियों की उम्र 70 वर्ष से अधिक हो चुकी है या जिनका राज्यसभा कार्यकाल इस साल या अगले साल की शुरुआत में खत्म हो रहा है, उन्हें वापस संगठन के काम में सक्रिय किया जा सकता है। दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और उत्तर प्रदेश के कुछ राज्य मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा की जा रही है, जिसके आधार पर रेल, वित्त, कृषि, सूचना और प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, जल शक्ति जैसे अहम मंत्रालयों में राज्य मंत्री बदले जा सकते हैं।


