बगहा में विकास के दावों की खुली पोल: बिना बरसात के तालाब बनी रामधाम मंदिर सड़क, आक्रोशित जनता ने दी आंदोलन की चेतावनी

बिहार के बगहा से नगर परिषद प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। नगर परिषद बगहा के वार्ड संख्या 26 और 27 को आपस में जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग इन दिनों बदहाली के आंसू रो रहा है। भीषण गर्मी के इस मौसम में भी रामधाम मंदिर जाने वाली मुख्य सड़क पर भारी जलजमाव हो गया है, जिससे यह पूरा रास्ता किसी तालाब में तब्दील हो चुका है। स्थानीय चिकित्सक डॉ. राजेश सिंह नीरज के आवास के पास सड़क पर पिछले कई दिनों से नालियों का गंदा पानी जमा है। इस दूषित पानी के बीच से ही स्कूली बच्चे, मरीज और आम राहगीर गुजरने को मजबूर हैं, जिसके चलते स्थानीय नागरिकों में नगर परिषद के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है।
स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी मुसीबतें, बीमारियों का खतरा
सड़क के एक बड़े हिस्से में घुटनों तक पानी भरे होने के कारण पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को अपनी जान जोखिम में डालकर निकलना पड़ रहा है। प्रतिदिन सुबह इसी रास्ते से होकर नन्हे-मुन्ने बच्चे विद्यालय जाते हैं, जो कई बार इस गंदे पानी में फिसलकर चोटिल होने से बचे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मार्ग केवल रामधाम मंदिर ही नहीं, बल्कि मुख्य बाजार और आपातकालीन अस्पताल तक पहुंचने का भी इकलौता जरिया है। ऐसे में रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही इसी जलजमाव वाले रास्ते से होती है। जलजमाव के कारण इलाके में मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों और महामारी फैलने की आशंका से भी लोग भयभीत हैं। जनता का आरोप है कि नगर परिषद हर साल नालियों की उड़ाही और विकास के नाम पर लाखों रुपये के बजट का दावा करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। अभी तो मानसून की शुरुआती बारिश भी नहीं हुई है, तब यह हाल है। अगर भारी बारिश हुई तो पूरा इलाका टापू बन जाएगा।
अतिक्रमण बना स्थायी समाधान में रोड़ा
इस पूरे मामले पर जब वार्ड संख्या 26 के वार्ड पार्षद प्रतिनिधि डॉ. राजू सिंह से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि वार्ड संख्या 27 में कुछ सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण है। इसी वजह से वहां पर स्थायी नाली और पुलिया का निर्माण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने खुद मौके पर आकर स्थिति का जायजा लिया था। जनता ने पाइप और छोटी पुलिया के जरिए पानी निकालने का विकल्प सुझाया था, लेकिन अतिक्रमण के चलते वह योजना भी ठंडे बस्ते में चली गई।
दूसरी तरफ, नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी सरोज कुमार बैठा ने इस विषय पर सफाई देते हुए कहा कि संबंधित सफाई एजेंसी को तुरंत नालियों को साफ करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल अस्थायी और वैकल्पिक माध्यमों से पानी की निकासी कराकर लोगों को राहत देने की कोशिश की जा रही है।
जनता ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी
हालांकि, स्थानीय निवासी अब अधिकारियों के खोखले आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। क्षेत्रवासियों ने साफ तौर पर कहा है कि प्रशासन को तुरंत इच्छाशक्ति दिखाते हुए सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाना चाहिए और यहां नाली व पुलिया का स्थायी निर्माण करना चाहिए। लोगों ने नगर परिषद प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है कि यदि जल्द ही इस नरकीय स्थिति से उन्हें मुक्ति नहीं मिली, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

