साइकिल चलाने वाले के बेटे ने बदली किस्मत: 3 लाख का कर्ज लेकर की UPSC की तैयारी, साइबर कैफे संचालक से ऐसे बने IAS अफसर मोइन अहमद

मुरादाबाद के एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाले मोइन अहमद मंसूरी आज देश के लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुके हैं। मुश्किल हालात और लगातार असफलताओं के बाद भी उन्होंने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। कभी घर चलाने के लिए साइबर कैफे चलाने वाले मोइन आज पश्चिम बंगाल में प्रशासनिक सेवा के एक बड़े पद पर तैनात हैं। हाल ही में 4 जुलाई 2026 को उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जलपाईगुड़ी सदर के नए एसडीएम (SDM) और एसडीओ (SDO) के रूप में कार्यभार संभालने की जानकारी साझा की, जिसके बाद से उन्हें लगातार बधाइयां मिल रही हैं।
मुरादाबाद के छोटे से गांव से दिल्ली तक का सफर
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की ठाकुरद्वारा तहसील के जटपुरा गांव के रहने वाले मोइन के पिता वली हसन पेशे से एक ड्राइवर हैं। एक आम परिवार से होने के कारण दिल्ली जाकर सिविल सेवा की कोचिंग करना उनके लिए आर्थिक रूप से नामुमकिन सा था। मोइन ने साल 2018 में अपने बड़े भाई मोहसिन के साथ मिलकर एक साइबर कैफे खोला ताकि घर की आमदनी में मदद हो सके। लेकिन उनके मन में देश सेवा का जज्बा था। दिल्ली जाने के लिए उन्होंने हार मानने के बजाय रास्ते निकाले। मोइन ने अपने कैफे पर डेढ़ लाख रुपये का बिजनेस लोन लिया और बाकी के डेढ़ लाख रुपये अपने दादा के किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के जरिए जुटाए। कुल 3 लाख रुपये का कर्ज लेकर वे साल 2019 में दिल्ली पहुंचे।
लगातार तीन बार मिली नाकामी, फिर ऐसे बदला वक्त
दिल्ली का खर्च महंगा था और शुरुआत में मोइन को लगातार झटके लगे। वे साल 2019, 2020 और 2021 में लगातार तीन बार यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा (प्रिलिम्स) भी पास नहीं कर पाए। इस बीच उनके पास मौजूद 3 लाख रुपये की रकम भी खत्म हो गई। आर्थिक तंगी के इस मुश्किल दौर में दिल्ली के करोलबाग स्थित अतिया फाउंडेशन ने उनकी मदद की और उनकी आगे की पढ़ाई का पूरा जिम्मा उठाया। कोविड-19 महामारी के दौरान जब वे हताश होकर गांव लौट गए थे, तब उनके माता-पिता और भाई ने उनका हौसला बढ़ाया।
तीन बार फेल होने के बाद मोइन ने अपनी गलतियों का गहराई से विश्लेषण किया। उन्होंने एक डायरी में अपनी कमजोरियों को लिखा और उन पर कड़ी मेहनत की। उनकी यह सटीक रणनीति काम आई और अपने चौथे प्रयास (UPSC 2022) में उन्होंने न सिर्फ प्रिलिम्स, बल्कि मेन्स और इंटरव्यू को एक ही बार में पास कर लिया। ऑल इंडिया 296वीं रैंक हासिल कर वे साल 2023 बैच के आईएएस अधिकारी बने।
पहली फील्ड पोस्टिंग में संभाली बड़ी जिम्मेदारी
पश्चिम बंगाल कैडर के इस युवा आईएएस अधिकारी को पहली पोस्टिंग कोलकाता स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन में ओएसडी के रूप में मिली थी। इसके बाद 27 मार्च 2026 को उन्हें जलपाईगुड़ी सदर का एसडीएम बनाया गया। यह उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग है। इसके साथ ही वे डिप्टी कंट्रोलर ऑफ सिविल डिफेंस और जिला सैनिक बोर्ड के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
चुनाव संपन्न कराना रहा सबसे बड़ा अनुभव
आईएएस मोइन अहमद मंसूरी के मुताबिक, पद संभालने के तुरंत बाद अप्रैल 2026 में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना उनके करियर की सबसे बड़ी परीक्षा और सबसे शानदार अनुभव रहा। बतौर रिटर्निंग ऑफिसर उन्होंने पूरी प्रशासनिक टीम के साथ मिलकर क्षेत्र में निष्पक्ष चुनाव कराए, जिसे वे अपने सफर का सबसे गौरवशाली पल मानते हैं।


