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गंडक के रौद्र रूप से खड्डा में तबाही की आशंका: नेपाल में भारी बारिश के बाद प्रशासन हाई अलर्ट पर

खड्डा/कुशीनगर

नेपाल के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी तीन दिनों के रेड अलर्ट के बाद सीमावर्ती खड्डा तहसील क्षेत्र में गंडक (नारायणी) नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने गंडक के साथ-साथ कोशी, बागमती और कर्णाली जैसी बड़ी नदियों में भी उफान आने की चेतावनी दी है, जिसके चलते प्रशासन बेहद गंभीर है।

नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण अगले 72 घंटे बेहद संवेदनशील माने जा रहे हैं। पहाड़ों से आ रहे भारी पानी की वजह से तराई इलाकों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बन सकती है, जिसका सीधा असर खड्डा के निचले इलाकों पर पड़ेगा।

तटीय गांवों में दहशत, ग्रामीण परेशान

गंडक नदी के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी ने नारायणपुर, शिवपुर, मरीचहवा, सालिकपुर और महदेवा जैसे तटीय गांवों के निवासियों की नींद उड़ा दी है। हर साल मानसून में इन गांवों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। ग्रामीणों को डर है कि यदि नदी का पानी रिहायशी इलाकों में घुसा तो उनका संपर्क पूरी तरह टूट जाएगा। स्थानीय लोग खुद ही नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं और प्रशासन से सुरक्षात्मक कदम उठाने की गुहार लगा रहे हैं।

प्रशासनिक अमला मुस्तैद, बाढ़ चौकियों को किया सक्रिय

बाढ़ के संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खड्डा क्षेत्र की सभी बाढ़ चौकियों को चौबीसों घंटे निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व और राहत टीमों को मुस्तैद रहने को कहा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि वे नेपाल के बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर लगातार नजर रख रहे हैं।

फसलों पर मंडराया संकट, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

धान की रोपाई और खरीफ फसलों के इस सीजन में बाढ़ का आना किसानों के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। यदि नदी का पानी खेतों में घुसता है तो हजारों हेक्टेयर में लगी फसल बर्बाद हो जाएगी। इसके साथ ही पशुपालकों के सामने अपने मवेशियों के चारे और उनकी सुरक्षा का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।

अफवाहों से बचने और सुरक्षित रहने की अपील

प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले परिवारों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान न दें। बच्चों और मवेशियों को नदी की तरफ जाने से रोकें। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में तुरंत ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें और किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में तुरंत स्थानीय कंट्रोल रूम या अधिकारियों को सूचित करें।

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