नर्मदा जल विवाद का हुआ ऐतिहासिक अंत, गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में चार राज्यों ने किया समझौता

नई दिल्ली। भारत की सबसे बड़ी बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं में से एक, नर्मदा परियोजना को लेकर चार राज्यों के बीच चल रहा दशकों पुराना गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र के बीच लंबित विवादों पर ऐतिहासिक सहमति बनी। इस बैठक में चारों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक साझा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे सरदार सरोवर परियोजना की लागत, मुआवजे और विस्थापन से जुड़े कई जटिल मुद्दों का स्थायी समाधान हो गया है।
यह समझौता न केवल राज्यों के बीच वित्तीय तालमेल को बेहतर करेगा, बल्कि उन हजारों विस्थापित परिवारों के लिए भी बड़ी उम्मीद लेकर आया है जो पिछले कई वर्षों से उचित पुनर्वास और मुआवजे की आस लगाए बैठे थे। केंद्र सरकार ने इस समझौते को देश में सहकारी संघवाद की एक अभूतपूर्व मिसाल बताया है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल भी उपस्थित थे। समझौते पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने दस्तखत किए।
समझौते की मुख्य बातें और विवाद की वजह
नर्मदा नदी पर निर्मित सरदार सरोवर परियोजना देश की कृषि, पेयजल और बिजली आपूर्ति की जीवन रेखा मानी जाती है। इससे चारों राज्यों को बड़े पैमाने पर लाभ मिलता है। हालांकि, बांध के निर्माण के समय से ही इसकी लागत को आपस में बांटने, डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों के विस्थापन, मुआवजे और वित्तीय देनदारियों को लेकर राज्यों के बीच गहरे मतभेद थे। कई दौर की वार्ताओं के बाद भी इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पा रहा था। अब केंद्र सरकार के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद चारों राज्यों ने आपसी समन्वय से इस विवाद को हमेशा के लिए विदा करने का फैसला किया है।
वन-टाइम सेटलमेंट से सुलझेगा पैसों का मामला
इस नए समझौते के तहत राज्यों के बीच जितने भी पुराने वित्तीय विवाद और बकाया राशियां थीं, उनका निपटारा वन-टाइम सेटलमेंट यानी एकमुश्त भुगतान के जरिए किया जाएगा। इस कदम से भविष्य में परियोजना की राह में आने वाली तमाम आर्थिक अड़चनें दूर हो जाएंगी और बांध के रखरखाव व विकास कार्यों को बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ाया जा सकेगा।
सहकारी संघवाद की जीत: अमित शाह
बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नर्मदा अवॉर्ड के तहत चारों राज्यों के बीच भुगतान और पुनर्वास को लेकर लंबे समय से विवाद बना हुआ था। आज सभी पक्षों ने बेहद सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत करते हुए इस समस्या का समाधान खोज लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समझौता राज्यों के बीच आपसी विश्वास को मजबूत करेगा और देश के विकास में सहकारी संघवाद की भावना को एक नई ऊंचाई देगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हमेशा से अंतरराज्यीय विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की पक्षधर रही है।
प्रभावित परिवारों और किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
इस समझौते का सबसे सकारात्मक असर नर्मदा परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले उन हजारों परिवारों पर पड़ेगा जो लंबे समय से प्रशासनिक और वित्तीय पेचीदगियों के कारण पुनर्वास के लाभ से वंचित थे। अब वित्तीय बाधाएं हटने से मुआवजे के वितरण और पुनर्वास की प्रक्रिया में तेजी आएगी। इसके साथ ही चारों राज्यों में सिंचाई नेटवर्क के विस्तार, पीने के पानी की योजनाओं और जल विद्युत उत्पादन की क्षमता में भी बड़ा सुधार देखने को मिलेगा, जिससे करोड़ों लोगों का जीवन सुगम होगा। Experts का मानना है कि यह समझौता भविष्य में अन्य अंतरराज्यीय नदी विवादों को सुलझाने के लिए एक रोल मॉडल साबित होगा।


