बगहा के वार्ड-8 में जलजमाव से त्राहि-त्राहि, आक्रोशित जनता ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ खोला मोर्चा

बिहार के बगहा नगर परिषद के वार्ड संख्या-8 में बदहाल जलनिकासी व्यवस्था ने स्थानीय नागरिकों के जीवन को नरक बना दिया है। नालियों का दूषित पानी सड़कों पर बहने के साथ-साथ अब लोगों के घरों में भी प्रवेश करने लगा है। इस स्थिति के कारण पूरे क्षेत्र में असहनीय दुर्गंध फैली हुई है, जिससे स्थानीय निवासियों का घरों से निकलना और सामान्य जीवन जीना पूरी तरह मुहाल हो चुका है।
स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद के चेयरमैन और संबंधित वार्ड सदस्य के प्रति गहरा रोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को इस गंभीर समस्या से बार-बार अवगत कराया जा चुका है, परंतु धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नागरिकों के अनुसार, हर बार शिकायत करने पर केवल खोखले आश्वासन ही मिलते हैं, जबकि वास्तविक स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है।
जलजमाव और गंदगी के कारण सबसे अधिक परेशानी बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को हो रही है। स्कूली बच्चों को हर दिन इसी गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे उनके बीमार होने का खतरा काफी बढ़ गया है। दूषित पानी और गंदगी के ठहराव से क्षेत्र में मच्छरों का भारी प्रकोप हो गया है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका से स्थानीय लोग भयभीत हैं।
मोहल्ले के लोगों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा स्वच्छता और बुनियादी ढांचे के विकास पर हर साल लाखों रुपये खर्च करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वार्ड संख्या-8 की यह दुर्दशा उन सभी दावों की वास्तविकता को उजागर कर रही है। यदि समय रहते नालियों की समुचित सफाई और मरम्मत सुनिश्चित की जाती, तो आज जनता को इस तरह की भारी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।
परेशान वार्डवासियों ने चेयरमैन और वार्ड पार्षद से इस समस्या के तत्काल और स्थाई समाधान की मांग की है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे नगर परिषद कार्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य होंगे और लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि उन्हें किसी तरह की राजनीति से सरोकार नहीं है, उन्हें केवल अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित परिवेश चाहिए।
इस समाचार में स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से नागरिकों के बयानों और दावों पर आधारित हैं। पत्रकारिता के तय मानकों और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए इस विषय पर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है।



