अमेरिका और ईरान में फिर ठनी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया जबरदस्त उछाल

वैश्विक मंच पर भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा और बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के बाजार पर पड़ा है। बुधवार को व्यापारिक सत्र के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में अचानक जोरदार तेजी दर्ज की गई, जिसने दुनिया भर के वित्तीय और ऊर्जा बाजारों को चिंता में डाल दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड करीब 2.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर 76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी मजबूती दिखाते हुए 72 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का यह विवाद जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले समय में दुनिया भर के देशों में ईंधन की कीमतों पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है।
बाजार में मौजूदा क्रूड की कीमतें
ब्रेंट क्रूड: 76 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर
डब्ल्यूटीआई क्रूड: 72 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर
जानिए क्यों भड़का नया सैन्य विवाद?
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह हालिया सैन्य कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। अमेरिका ने ईरान समर्थित ठिकानों को निशाना बनाकर हवाई हमले किए हैं। दूसरी तरफ, ईरानी मीडिया आउटलेट्स ने भी इस बात की पुष्टि की है कि होर्मुज जलमार्ग के पास स्थित एक द्वीप पर कई भीषण धमाके सुने गए हैं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद तेहरान प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे दोनों शक्तिशाली देशों के बीच सीधे टकराव की आशंका काफी बढ़ गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व और तेल संकट का डर
रणनीतिक नजरिए से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल शिपिंग रूट माना जाता है। वैश्विक स्तर पर कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा यानी करीब 20 प्रतिशत सप्लाई इसी संकरे समुद्री रास्ते के जरिए होती है। हाल ही में इस इलाके से गुजर रहे तीन बड़े व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया गया था, जिनमें एक सऊदी अरब का तेल टैंकर और एक गैस कैरियर भी शामिल था। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दिनों हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद इसे सुरक्षा के लिहाज से सबसे बड़ी चूक और बड़ी घटना माना जा रहा है। यही वजह है कि वैश्विक निवेशकों में सप्लाई चेन टूटने का डर बैठ गया है।
ईरानी तेल निर्यात पर फिर लगी पाबंदी
हालात बिगड़ने के साथ ही अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरान को दी गई उस विशेष प्रतिबंध छूट को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है, जो पिछले महीने हुए अस्थायी शांति समझौते के तहत दी गई थी। इस छूट के खत्म होने से ईरान अब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीमित मात्रा में भी तेल नहीं बेच पाएगा। ईरान पर दोबारा कड़े प्रतिबंध लागू होने से बाजार में कच्चे तेल की उपलब्धता कम होने का खतरा पैदा हो गया है।
क्या होगा आगे का परिदृश्य?
कुछ दिनों पहले तक स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत थी। पश्चिम एशिया में शांति बहाली की उम्मीदों के बीच क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार नीचे आ रही थीं। प्रमुख तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस ने भी अपनी उत्पादन कटौती को धीरे-धीरे वापस लेना शुरू कर दिया था। यहाँ तक कि गोल्डमैन सैश जैसी दिग्गज वैश्विक ब्रोकरेज फर्म्स ने अनुमान जताया था कि बाजार में मांग की तुलना में तेल की आपूर्ति अधिक रह सकती है। लेकिन इस नई सैन्य तनातनी ने सारे समीकरणों को पलट कर रख दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की किल्लत बढ़ सकती है, जिससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा।



