धनहा रतवल पुल में आई बड़ी दरार: बिहार यूपी को जोड़ने वाले गौतम बुद्ध सेतु पर मंडराया खतरा ग्रामीणों का प्रदर्शन

पश्चिम चंपारण के बगहा से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश की लाइफलाइन माना जाने वाला धनहा-रतवल पुल (गौतम बुद्ध सेतु) इस वक्त खुद बड़े खतरे में नजर आ रहा है। गंडक नदी पर बने इस लगभग 1.84 किलोमीटर लंबे महासेतु के बीचों-बीच एक बड़ा गैप (दरार) आ गया है। सोशल मीडिया पर इस जर्जर हालत का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासन से लेकर आम जनता तक हड़कंप मचा दिया है।
करोड़ों की लागत से बना पुल 12 साल भी नहीं झेल पाया रफ्तार
आपको बता दें कि इस महत्वपूर्ण पुल का उद्घाटन 26 नवंबर 2013 को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया था। इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब 500 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत आई थी, जिसमें अकेले पुल के निर्माण पर 356 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस पुल के बनने से धनहा से बेतिया के बीच की दूरी 155 किलोमीटर से घटकर महज 60 किलोमीटर रह गई थी। यूपी और बिहार के सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने के कारण यहां से रोजाना हजारों वाहनों और लाखों लोगों की आवाजाही होती है।
जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर लोग
पुल के बीच में आई इस भयानक दरार को देखकर स्थानीय निवासियों और राहगीरों में भारी आक्रोश है। वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए हैं। स्थानीय इंजीनियर हरिंदर सिंह सहित कई ग्रामीणों ने पुल की गुणवत्ता और इसके रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि 500 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल 12 साल भी सही तरीके से नहीं चल पाया। अब हर वक्त इसके टूटने का डर सताता रहता है और लोग जान हथेली पर रखकर इसे पार करने को मजबूर हैं।
मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों का आरोप है कि पुल के ऊपर से गाड़ियां गुजरने पर इसमें तेज कंपन महसूस होता है और डैमेज लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग और प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति करने में जुटा है। इंटरनेट पर भी लोग हैशटैग धनहा_पुल_बचाओ के साथ अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। बगहा और वाल्मीकि नगर क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से तुरंत इसकी उच्चस्तरीय जांच और मरम्मत की मांग की है। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों के भीतर प्रशासन ने इस पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे चक्का जाम कर एक बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे।
यह पुल न केवल दोनों राज्यों के व्यापार और कृषि के लिए जरूरी है, बल्कि इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं के लिए भी एक एकमात्र सहारा है। पुल की इस हालत से अब भारी वाहनों के पलटने या किसी बड़े हादसे का खतरा मंडराने लगा है। फिलहाल इस मामले पर प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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