रामनगर PHC में मंत्री का औचक निरीक्षण: गंदगी और अवैध वसूली देख भड़के, प्रभारी चिकित्साधिकारी समेत 2 नर्स सस्पेंड
पशुपालन एवं डेयरी मंत्री नंदकिशोर राम ने रामनगर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) का औचक निरीक्षण कर स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। अस्पताल में व्याप्त भयंकर गंदगी, मरीजों से अवैध वसूली और ड्यूटी से नदारद रहने वाले डॉक्टरों की सच्चाई सामने आने के बाद मंत्री का गुस्सा फूट पड़ा। इस गंभीर लापरवाही पर त्वरित एक्शन लेते हुए मंत्री ने प्रभारी चिकित्साधिकारी और दो स्टाफ नर्सों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल के अंदर का नजारा बेहद चौंकाने वाला था। मरीजों के वार्ड में हफ्तों से बेडशीट नहीं बदली गई थी, फर्श पर धूल की परतें जमी थीं और दीवारों पर पान-गुटखे के दाग साफ नजर आ रहे थे। शौचालयों की स्थिति इतनी बदतर थी कि बदबू के कारण मरीजों को मजबूरन बाहर शौच के लिए जाना पड़ रहा था। इसके अलावा, मरीजों और उनके तीमारदारों ने मंत्री से सीधे शिकायत की कि सरकार द्वारा मुफ्त जांच और दवाओं की सुविधा दिए जाने के बावजूद उनसे अवैध वसूली की जा रही है। जब मंत्री ने दस्तावेजों की जांच की, तो दवा स्टॉक रजिस्टर में भी भारी हेराफेरी पकड़ी गई। कई जरूरी दवाएं कागजों पर तो मौजूद थीं, लेकिन असल में मरीजों की पहुंच से दूर थीं। हद तो तब हो गई जब कई डॉक्टर और नर्स अपनी ड्यूटी से नदारद मिले और बायोमेट्रिक हाजिरी में भी फर्जीवाड़ा सामने आया।
रामनगर PHC: अस्पताल की इस भयानक दुर्दशा और मरीजों की परेशानी को देखकर मंत्री नंदकिशोर राम ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद मरीजों को बुनियादी सुविधाएं न मिलना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नाराजगी के चलते प्रभारी चिकित्साधिकारी और दो स्टाफ नर्सों को सस्पेंड करने के साथ-साथ, अवैध वसूली में शामिल कर्मचारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं। अस्पताल की व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए मंत्री ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अगले 24 घंटे के भीतर पूरे पीएचसी की सघन सफाई और सैनिटाइजेशन करने का अल्टीमेटम दिया है। साथ ही सख्त हिदायत दी है कि मरीजों से किसी भी प्रकार की वसूली तुरंत बंद हो और इसके लिए अस्पताल परिसर में शिकायत पेटी लगाई जाए। दवाओं की कालाबाजारी रोकने के लिए अब दवा वितरण सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में किया जाएगा। हर हफ्ते अस्पताल की सफाई और मरीजों की संतुष्टि की विस्तृत रिपोर्ट सीधे मंत्री कार्यालय में भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं। मंत्री के इस औचक और सख्त एक्शन की स्थानीय लोगों ने जमकर सराहना की है। आम जनता का कहना है कि अगर इसी तरह लगातार निरीक्षण होते रहें, तो सरकारी अस्पतालों की बदहाली जल्द ही खत्म हो जाएगी।



