उत्तर प्रदेश

राम मंदिर डोनेशन हेरफेर: गणनाकर्मियों से मैराथन पूछताछ के बाद आज लखनऊ लौट सकती है एसआईटी, मुख्यमंत्री ने दिए 15 दिनों में कार्रवाई के निर्देश

अयोध्या

में जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी और चोरी के गंभीर आरोपों की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती दिख रही है। मामले की तह तक जाने के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बीते कई दिनों से अयोध्या में डेरा डाला हुआ है। जांच टीम ने इस दौरान मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों, पैसों की गिनती करने वाले कर्मियों और अन्य कर्मचारियों से सिलसिलेवार तरीके से पूछताछ की है। शनिवार को सात प्रमुख गणनाकर्मियों से लंबी पूछताछ पूरी करने के बाद संभावना जताई जा रही है कि एसआईटी की टीम आज लखनऊ वापस लौट सकती है, जहां वह अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगी।

इस पूरे संवेदनशील मामले पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद नजर बनाए हुए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि आगामी 15 दिनों के भीतर इस पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच रिपोर्ट सामने आ जाएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध बेहद कड़ी और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आम जनता और राजनीतिक दलों से अपील की है कि जब तक आधिकारिक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी तरह की निराधार बयानबाजी से बचा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास इस मामले से जुड़ा कोई भी ठोस प्रमाण है, तो वह उसे सीधे एसआईटी को सौंप सकता है।

जांच के दायरे में आए ट्रस्ट के पदाधिकारी और कर्मचारी

अपनी तफ्तीश के दौरान विशेष जांच दल ने श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र समेत कई जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए हैं। एसआईटी मुख्य रूप से इस बात की पड़ताल कर रही है कि मंदिर में आने वाली नकदी की गिनती किस प्रकार होती है, उसका लेखा-जोखा कैसे रखा जाता है, बैंक में धनराशि जमा करने की क्या प्रक्रिया है और परिसर की सीसीटीवी निगरानी प्रणाली कितनी पुख्ता है। बारीकी से जांच के लिए कुछ कर्मचारियों को दोबारा बुलाकर भी सवाल-जवाब किए गए हैं।

पूर्व इंजीनियर के आरोपों से गर्माया माहौल

इस पूरे मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब ट्रस्ट के पूर्व इंजीनियर दीनानाथ वर्मा ने मीडिया के सामने आकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सीधे तौर पर ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र पर वित्तीय कार्यों में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने का आरोप मढ़ा। पूर्व इंजीनियर ने दावा किया कि मंदिर के वित्तीय प्रबंधन में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही थीं। हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक या कानूनी पुष्टि नहीं हुई है और एसआईटी इन आरोपों के हर पहलू को खंगाल रही है।

मामले से जुड़ी अब तक की प्रमुख कड़ियां

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बीते 7 जून को हुई थी, जब पहली बार चढ़ावे में विसंगतियों की बात सामने आई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 8 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने भी इस पर संज्ञान लिया। इसके बाद 10 जून को पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसने इस विवाद को और हवा दे दी। बिगड़ते हालात और विपक्ष के हमलों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार ने एक्शन लेते हुए 13 जून को तीन सदस्यों वाली एसआईटी का गठन कर दिया। 16 जून से एसआईटी ने अयोध्या में मोर्चा संभाला और फाइलों को खंगालने के साथ पूछताछ शुरू की। इसके बाद 19 जून को चंपतराय सहित अन्य लोगों से दोबारा पूछताछ हुई और अब 20 जून को सात गणनाकर्मियों के बयान दर्ज होने के बाद टीम की लखनऊ वापसी की तैयारी है।

आगे की राह और राजनीतिक सरगर्मी

  1. एसआईटी अपनी इस विस्तृत और गोपनीय रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश शासन के समक्ष प्रस्तुत करेगी। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियों और निष्कर्षों के आधार पर ही तय होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाएंगे, जैसे कि एफआईआर दर्ज करना या विभागीय कार्रवाई करना। फिलहाल इस मुद्दे को लेकर सूबे की सियासत भी गर्म है। विपक्ष लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, वहीं सरकार का साफ रुख है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होगी और सच्चाई को दबाया नहीं जाएगा।

वंदे भारत के लेट होने पर अब भूखे नहीं रहेंगे यात्री, रेलवे देगा मुफ्त खाना और पानी

संबंधित लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button