लाखों की लागत पर फिरा पानी: बगहा में जनसुविधा के नाम पर बना मूत्रालय अब दे रहा बीमारियों को न्योता, जिम्मेदार बेपरवाह

बिहार के पश्चिमी हिस्से में स्थित बगहा नगर परिषद के दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। नगर परिषद के वार्ड संख्या 27 में डीएम एकेडमी विद्यालय के ठीक पश्चिम दिशा में लाखों रुपये की लागत से बनाया गया सार्वजनिक मूत्रालय आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस व्यवस्था को आम जनता, व्यापारियों और बैंक आने-जाने वाले लोगों की सुविधा के लिए करोड़ों के स्वच्छता बजट में से तैयार किया गया था, वह आज रखरखाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण कबाड़ और शोपीस बनकर रह गया है। नियमित सफाई न होने से इस परिसर में गंदगी का अंबार लगा है और चारों तरफ से उठती तीखी दुर्गंध ने स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस मूत्रालय के भीतर जाना तो दूर, इसके पास से गुजरना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है। चारों ओर फैली गंदगी, टूटे दरवाजे और सीट की दुर्दशा के कारण लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। नतीजा यह है कि लोग खुले में शौच और पेशाब करने को मजबूर हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है। नागरिकों का आरोप है कि अगर नगर परिषद प्रशासन ने समय रहते इसकी सुध ली होती, तो सरकारी धन की इस तरह बर्बादी नहीं होती।
इस बदहाली के बीच एक बड़ा घालमेल केयरटेकर की तैनाती को लेकर भी सामने आया है। मूत्रालय की दीवार पर आज भी विशाल कुमार नामक कर्मी का नाम और मोबाइल नंबर केयरटेकर के तौर पर लिखा हुआ है। लेकिन जब उनसे इस दुर्दशा को लेकर बात की गई, तो उन्होंने एक चौंकाने वाला खुलासा किया। विशाल कुमार ने बताया कि वर्तमान में उनकी ड्यूटी इस जगह पर है ही नहीं, बल्कि काफी समय पहले ही उनका तबादला दूसरे वार्ड में कर दिया गया था। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे जल्द ही इस दीवार से अपना नाम हटवाकर वर्तमान कर्मी का विवरण लिखवा देंगे। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब महीनों पहले केयरटेकर बदल गया, तो सूचना बोर्ड को अपडेट क्यों नहीं किया गया और वर्तमान में इस मूत्रालय की जिम्मेदारी किस कर्मचारी के पास है?
मामले में एक और बड़ी प्रशासनिक चूक देखने को मिल रही है। इस पूरे परिसर में कहीं भी कोई ऐसा सूचना पट्ट (साइनबोर्ड) नहीं लगाया गया है जिससे यह पता चल सके कि इस योजना की कुल लागत कितनी थी, इसे किस एजेंसी ने बनाया और इसकी कार्य अवधि क्या थी। हालांकि, राजनीतिक चमक बिखेरने के लिए दीवार पर तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी मुकेश कुमार, तत्कालीन मुख्य पार्षद पुष्पा गुप्ता और उपविजेता रश्मि रंजन के नाम बड़े-बड़े अक्षरों में जरूर उकेरे गए हैं। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर निर्माण से जुड़े वित्तीय आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं किए गए?इस पूरे मामले पर स्थानीय वार्ड पार्षद प्रतिनिधि मोबिन अंसारी ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि मूत्रालय की यह स्थिति वाकई चिंताजनक है और वे जल्द ही इस पूरी समस्या से नगर परिषद के वर्तमान कार्यपालक पदाधिकारी को लिखित रूप से अवगत कराएंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मूत्रालय की मरम्मत, नियमित साफ-सफाई और नए केयरटेकर की तैनाती सुनिश्चित कराने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा ताकि जनता को इस परेशानी से मुक्ति मिल सके। अब देखना यह है कि कुंभकर्णी नींद में सोया नगर परिषद प्रशासन इस जनहित के मुद्दे पर कब तक जागता है।
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