बगहा में पंचायत सरकार भवन परिसर में भ्रष्टाचार पर गिरी गाज, सोखता निर्माण कार्य पर तत्काल रोक

बगहा में विकास कार्यों में धांधली और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। बगहा प्रखंड की छोटकी पट्टी बड़गांव पंचायत के वार्ड संख्या 11 में स्थित पंचायत सरकार भवन परिसर में सोखता गड्ढे का निर्माण कराया जा रहा था। इस निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर अनियमितता और तकनीकी खामियां पाई गईं, जिसके बाद प्रशासनिक विभाग ने एक्शन लेते हुए काम पर तुरंत रोक लगा दी है।
ग्रामीणों ने इस निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) प्रदीप कुमार से लिखित शिकायत की थी। जनता की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार को कनीय अभियंता आशुतोष कुमार ने निर्माण स्थल का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान ग्रामीणों के आरोप सौ फीसदी सही पाए गए। कनीय अभियंता ने पुष्टि की कि सोखता निर्माण में नए मटीरियल की जगह पुराने और जंग लगे सरिया का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था, जो तकनीकी मानकों के सर्वथा खिलाफ है।
इस गंभीर लापरवाही के सामने आने के बाद कनीय अभियंता ने संवेदक को काम तुरंत बंद करने का कड़ा आदेश जारी किया है। साथ ही, अब तक बने घटिया और अवैध ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त कर नए सिरे से, सरकारी मानकों के अनुसार निर्माण शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि वे निर्माण की शुरुआत से ही पुराने सरिया के इस्तेमाल का विरोध कर रहे थे, लेकिन शुरुआती दौर में उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। आखिरकार विभागीय जांच में सच सामने आने के बाद ही प्रशासन जागा।
इस मामले ने पंचायत में चल रही अन्य विकास योजनाओं की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और प्रतिनिधियों ने बड़गांव पंचायत में चल रहे सभी विकास कार्यों की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी पैसे का दुरुपयोग करने वाले और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही, स्थानीय वार्ड सदस्य प्रतिनिधि दिलीप यादव, बच्चा यादव, अमर यादव, रमाकांत शाह, मोती साह और हीरा दास ने एक और गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पंचायत की निर्वाचित महिला मुखिया के बजाय उनके पति ही अनौपचारिक रूप से अधिकांश विकास कार्यों का संचालन, वित्तीय लेन-देन और निगरानी करते हैं, जो पंचायती राज व्यवस्था के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
इस गंभीर आरोप और निर्माण कार्य पर लगी रोक के संबंध में जब मुखिया और उनके पति से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो समाचार जारी होने तक उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।



