
5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन, शिमला में होंगे सम्मानित
सरस्वती विद्या मंदिर पतिलार के पूर्ववर्ती छात्र एवं राजकीय महाविद्यालय चंबा के युवा प्राध्यापक डॉ. प्रशांत रमण रवि को शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, डिजिटल माध्यमों के प्रभावी उपयोग तथा हिंदी विषय को विद्यार्थियों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए इस वर्ष के हिमाचल प्रदेश शिक्षक सम्मान (कॉलेज कैडर) से सम्मानित किया जाएगा। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन, शिमला में आयोजित समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जाएगा। बता दें कि प्रशांत पश्चिमी चंपारण के पतिलार गांव के निवासी हैं, एवं उनकी शिक्षा दीक्षा स्थानीय सरस्वती विद्या मंदिर में पूरी हुई है।
डॉ. प्रशांत को यह सम्मान विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक सामग्री पहुंचाने, शिक्षण को अधिक सरल और रोचक बनाने तथा शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग करने के लिए दिया जा रहा है। उन्होंने तकनीक को केवल सूचना का माध्यम न मानकर उसे विद्यार्थियों के सीखने का प्रभावी साधन बनाया है।
डॉ. प्रशांत अपनी शिक्षण पद्धति के कारण विद्यार्थियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। उन्होंने यूट्यूब पर विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित लगभग 500 शैक्षणिक वीडियो तैयार किए हैं। इन वीडियो में हिंदी विषय की विभिन्न अवधारणाओं को सरल और सहज तरीके से समझाने का प्रयास किया गया है। हिमाचल के विद्यार्थियों से शुरू हुआ उनका यह प्रयास अब देश-दुनिया के हिंदी पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक पहुंच चुका है। उनके शैक्षणिक कंटेंट को अब तक 10 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है।
शिक्षण के साथ-साथ डॉ. प्रशांत विद्यार्थियों को कक्षा से बाहर सीखने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए भी लगातार काम करते रहे हैं। हाल ही में उन्होंने जिला प्रशासन चंबा के सहयोग से चंबा में पहली बार राष्ट्रीय स्तर के साहित्य उत्सव एवं पुस्तक मेले के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आयोजन के माध्यम से चंबा के हजारों युवा विद्यार्थियों को देशभर के प्रतिष्ठित साहित्यकारों और रचनाकारों से मिलने तथा उनसे सीधे संवाद करने का अवसर मिला।
डॉ. प्रशांत द्वारा शुरू की गई ‘युवा संवाद श्रृंखला’ भी विद्यार्थियों के बीच काफी लोकप्रिय है। इसके माध्यम से वे युवाओं को साहित्य, शिक्षा, प्रशासन, कला, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों से संवाद का अवसर उपलब्ध करवाते हैं। उनका प्रयास है कि विद्यार्थी केवल किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों से मिलें, सवाल पूछें और उनके अनुभवों से सीखें।
कक्षा-कक्ष के बाद भी विद्यार्थियों के साथ उनका संवाद जारी रहता है। वे समय-समय पर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, करियर और व्यक्तित्व विकास के लिए मार्गदर्शन देते रहते हैं। यही कारण है कि विद्यार्थियों के बीच उनकी पहचान केवल एक विषय अध्यापक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे शिक्षक के रूप में बनी है, जिससे वे अपनी पढ़ाई और भविष्य से जुड़े सवालों पर भी बात कर सकते हैं।
शिक्षण के अलावा डॉ. प्रशांत रचनात्मक लेखन और शोध के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी अब तक पाँच पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और 20 से अधिक शोध आलेख देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें हाल ही में विष्णु प्रभाकर राष्ट्रीय सम्मान 2026 से भी सम्मानित किया गया है।
मूल रूप से बिहार से संबंध रखने वाले डॉ. प्रशांत रमण रवि ने मात्र 23 वर्ष की आयु में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर सहायक प्रोफेसर के रूप में अपने अकादमिक जीवन की शुरुआत की थी। पिछले लगभग नौ वर्षों से वे चंबा जैसे दुर्गम और आकांक्षी जिले में लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
चंबा में उनकी यह यात्रा इस बात का उदाहरण है कि यदि अपने काम के प्रति जुनून और समर्पण हो तो परिस्थितियां और स्थान काम की राह में बाधा नहीं बनते। उन्होंने उपलब्ध संसाधनों के भीतर रहते हुए डिजिटल माध्यमों, साहित्यिक गतिविधियों और संवाद के नए मंचों के जरिए विद्यार्थियों को सीखने के अधिक अवसर देने का प्रयास किया है।
हिमाचल प्रदेश शिक्षक सम्मान (कॉलेज कैडर) प्राप्त करने वाले डॉ. प्रशांत रमण रवि अब तक के सबसे युवा अध्यापक बन गए हैं। उनकी यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा है जो शिक्षण के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।
डॉ प्रशांत की यह उपलब्धि न सिर्फ उनके लिए बल्कि राजकीय महाविद्यालय चम्बा और उनके सभी छात्रों के लिए भी गौरव का विषय है। डॉ प्रशांत की इस उपलब्धि पर उन्हें कोटि-कोटि बधाई।



