UPI New Rules: ₹2000 से ज्यादा के लेनदेन पर 0.40% MDR चार्ज लागू, जानें आम आदमी पर क्या होगा असर

भारत में डिजिटल पेमेंट के सबसे बड़े माध्यम यूपीआई (UPI) को लेकर एक बहुत बड़ा अपडेट सामने आया है। नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने नए दिशानिर्देश जारी करते हुए घोषणा की है कि आगामी 15 अक्टूबर से 2000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.40% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लागू किया जाएगा। हालांकि, इस नए बदलाव से आम जनता और छोटे दुकानदारों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
आइए जानते हैं एनपीसीआई (NPCI) की इन नई गाइडलाइंस से जुड़ी हर एक अहम बात:
1. आम आदमी और ग्राहकों के लिए क्या रहेगा नियम?
सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि आम ग्राहकों को यूपीआई भुगतान करने पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। सामान्य नागरिकों द्वारा किए जाने वाले रोजाना के सभी छोटे-बड़े ट्रांजैक्शन पूरी तरह फ्री बने रहेंगे। इसके अलावा, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले पैसे (P2P Transfers) पर भी कोई MDR नहीं लगेगा।
2. दुकानदारों और कारोबारियों पर क्या होगा असर?
नए नियमों के अनुसार, यह 0.40% का चार्ज केवल पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी बिजनेस अकाउंट्स पर लागू होगा, वो भी तब जब ग्राहक किसी सामान या सेवा के लिए 2000 रुपये से ज्यादा का भुगतान करेगा। यानी अगर आप किसी बड़े स्टोर या कमर्शियल मर्चेंट को 2000 रुपये से ऊपर का भुगतान करते हैं, तब यह चार्ज लागू होगा। छोटे और स्थानीय दुकानदारों को इस दायरे से बाहर रखा गया है ताकि छोटे कारोबार प्रभावित न हों।
3. बड़े ट्रांजैक्शन पर चार्ज की लिमिट (Cap)
भारी-भरकम कमर्शियल भुगतानों को ध्यान में रखते हुए एनपीसीआई ने एमडीआर चार्ज पर एक अधिकतम सीमा (Cap) तय कर दी है। यदि कोई सिंगल ट्रांजैक्शन 75,000 रुपये या उससे अधिक का होता है, तो उस पर अधिकतम 300 रुपये ही MDR शुल्क लगेगा। इससे बड़े व्यापारियों को वित्तीय रूप से अधिक स्पष्टता और राहत मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट के बुनियादी ढांचे (Infrastructure), साइबर सुरक्षा और पेमेंट इकोसिस्टम को और अधिक मजबूत तथा आधुनिक बनाना है।



