12 घंटे रेलवे फाटक उठाने वाले राजू कुमार अब संभालेंगे पुलिस कप्तानी, बिना कोचिंग ऐसे क्रैक की बीपीएससी परीक्षा

बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले राजू कुमार ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। रेलवे में प्वाइंट्समैन के तौर पर दिन-रात 12 घंटे की हाड़तोड़ नौकरी करने वाले राजू ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने पूरे राज्य में 72वीं रैंक प्राप्त कर डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस यानी डीएसपी का पद हासिल किया है। सबसे हैरान और प्रेरित करने वाली बात यह है कि इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने किसी नामी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया, बल्कि अपनी सेल्फ स्टडी और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर यह परचम लहराया है।
बचपन में ही उठ गया था पिता का साया, मां बनीं सबसे बड़ा संबल
राजू कुमार के जीवन का सफर बेहद कड़े संघर्षों से होकर गुजरा है। जब वह महज 12 वर्ष के थे, तभी उनके पिता का असमय निधन हो गया। पिता के जाने के बाद पूरे परिवार पर आर्थिक संकट का पहाड़ टूट पड़ा। गांव के सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले राजू के लिए बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग ज्वाइन करना एक दूर का सपना था। ऐसे कठिन समय में उनकी मां उनके जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा और ताकत बनीं। तमाम दुश्वारियों के बावजूद मां ने राजू का हौसला टूटने नहीं दिया और उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मां के इसी विश्वास को संबल बनाकर राजू ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।
पहले ही प्रयास में मिली रेलवे ग्रुप-डी की नौकरी
पारिवारिक जिम्मेदारियों को जल्द से जल्द संभालने की चाहत में राजू ने रेलवे की परीक्षा दी और अपने पहले ही प्रयास में ग्रुप-डी के तहत प्वाइंट्समैन की नौकरी हासिल कर ली। पिछले करीब 5 वर्षों से वह रेलवे में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उनकी इस नौकरी की प्रकृति बेहद चुनौतीपूर्ण थी, जहां उन्हें ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए रेलवे गेट या फाटक को ऑपरेट करना होता था और पटरियों के प्वाइंट्स को जोड़ने का काम करना पड़ता था।
मौसम की मार और 12 घंटे की ड्यूटी के बीच जलती रही अफसर बनने की लौ
रेलवे की यह नौकरी आसान नहीं थी। चाहे कड़कड़ाती ठंड हो, झुलसा देने वाली गर्मी हो या फिर मूसलाधार बारिश, राजू को रेलवे क्रॉसिंग पर मुस्तैदी से डटे रहना पड़ता था। इस 12 घंटे की थका देने वाली ड्यूटी के बाद भी उन्होंने अपनी आंखों से अफसर बनने का ख्वाब धुंधला नहीं होने दिया। कार्यस्थल की तमाम चुनौतियों के बीच उन्होंने पढ़ाई का समय निकाला। अपने दोस्तों की सलाह पर राजू ने नौकरी और पढ़ाई के बीच एक सटीक संतुलन तैयार किया। बिना किसी बाहरी गाइडेंस या कोचिंग के, उन्होंने बीपीएससी के पूरे सिलेबस को समझा, खुद के नोट्स बनाए और अनुशासित रहकर हर दिन तैयारी को धार दी।
मेहनत लाई रंग, 70वीं बीपीएससी में हासिल की 72वीं रैंक
जब 70वीं बीपीएससी परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ, तो राजू कुमार की मेहनत का रंग पूरी दुनिया के सामने था। उन्होंने राज्य स्तर पर 72वां स्थान हासिल कर सीधे डीएसपी के पद पर अपनी जगह पक्की कर ली। अपनी इस ऐतिहासिक कामयाबी का पूरा श्रेय राजू अपनी मां और अपने परिवार के त्याग को देते हैं, जिन्होंने हर मोड़ पर उनका हौसला बढ़ाया।
युवाओं के लिए राजू का खास संदेश
आर्थिक तंगी और विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे युवाओं को प्रेरित करते हुए राजू कुमार कहते हैं कि जिंदगी में हालात चाहे कितने भी विपरीत क्यों न हों, कभी भी हार नहीं माननी चाहिए। युवाओं को सबसे पहले अपना एक लक्ष्य तय करना चाहिए और फिर बिना विचलित हुए उसे पाने के लिए स्मार्ट प्लानिंग के साथ कड़ी मेहनत करनी चाहिए। अगर आप खुद पर भरोसा रखते हुए निरंतर प्रयास करते हैं, तो सफलता निश्चित तौर पर आपके कदम चूमेगी। राजू की यह कहानी आज देश के लाखों युवाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है।


