इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, कर्नाटक हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर लगाई रोक

देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति को लेकर जारी कानूनी बहस के बीच केंद्र सरकार के लिए राहत की बड़ी खबर आई है। देश की सर्वोच्च अदालत ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस अंतरिम फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें इस नीति को लेकर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया गया था और कुछ अंतरिम निर्देश जारी किए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब सरकार के इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन में फिलहाल कोई कानूनी अड़चन नहीं रहेगी।
यह पूरा विवाद कुछ ऐसी याचिकाओं के बाद शुरू हुआ था जिनमें दावा किया गया था कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से दुपहिया और चौपहिया वाहनों के इंजनों को नुकसान पहुंच रहा है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि इस ईंधन के इस्तेमाल से गाड़ियों का माइलेज कम हो रहा है, उनकी कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है और वाहन चालकों पर गाड़ियों के रखरखाव का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। इन्हीं दलीलों को आधार बनाकर कर्नाटक हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष केंद्र सरकार ने अपनी नीति का मजबूती से बचाव किया। सरकार ने अदालत को आश्वस्त किया कि देश में इथेनॉल मिलाने का निर्णय किसी जल्दबाजी या अनुमान के तहत नहीं लिया गया है। इसके पीछे लंबी वैज्ञानिक रिसर्च, कड़े तकनीकी परीक्षण और देश की शीर्ष विशेषज्ञ संस्थाओं की मंजूरियां शामिल हैं। केंद्र ने साफ किया कि भारत में सप्लाई किया जा रहा इथेनॉल मिश्रित ईंधन तय मानकों पर पूरी तरह खरा उतरता है और यह वाहन निर्माताओं के मापदंडों के अनुकूल है।
इसके साथ ही सरकार ने इस नीति के व्यापक फायदों को भी रेखांकित किया। केंद्र के अनुसार, इस कार्यक्रम का लक्ष्य केवल एक वैकल्पिक ईंधन पेश करना मात्र नहीं है, बल्कि इसके जरिए कच्चे तेल के भारी-भरकम आयात को कम करना, पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाना और कार्बन उत्सर्जन में कटौती करना है। इसके अतिरिक्त, इससे देश के किसानों की आय में बढ़ोतरी हो रही है क्योंकि गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग बाजार में बढ़ रही है।
सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार के इन तमाम तर्कों को संज्ञान में लेते हुए फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन को रोक दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस विषय पर आगे भी विस्तार से सुनवाई की जाएगी, जहां सभी पक्षों को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलेगा। जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सरकार की वर्तमान इथेनॉल मिश्रण नीति सुचारू रूप से लागू रहेगी।
ऑटोमोबाइल क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक, वर्तमान में बाजार में आ रहे अधिकांश नए वाहन E10 (10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण) के अनुकूल तैयार किए जा रहे हैं, जबकि कई आधुनिक मॉडल तो E20 ईंधन को भी आसानी से सपोर्ट करते हैं। हालांकि, पुराने वाहनों के इस्तेमालकर्ताओं को किसी भी तरह की तकनीकी परेशानी से बचने के लिए कंपनियों द्वारा जारी गाइडलाइंस को ध्यान में रखना चाहिए। फिलहाल शीर्ष अदालत के इस हस्तक्षेप से सरकार ने बड़ी राहत की सांस ली है और अब सभी की निगाहें इस मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं।कासगंज एनकाउंटर: शादी का कार्ड दिखा घर में घुसे बदमाश, बहू ने कमरे में किया बंद, पुलिस मुठभेड़ में दो को लगी गोली


