
तकनीकी की दुनिया में आने वाले बदलावों के साथ भारत अपनी स्थिति को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में देश ने अगली पीढ़ी के टेलीकॉम नेटवर्क यानी 6G के विकास को लेकर एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कदम उठाया है। भारत ने अमेरिका समेत दुनिया के 24 अन्य देशों के साथ हाथ मिलाते हुए एक साझा वैश्विक पहल में अपनी हिस्सेदारी तय की है। यह साझेदारी आने वाले समय में डिजिटल कनेक्टिविटी की रूपरेखा तय करने में अहम साबित हो सकती है।
इस पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में हाल ही में हुई उच्च-स्तरीय वार्ताओं की बड़ी भूमिका रही है। केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक के बीच हुई बैठकों के दौरान तकनीकी सहयोग और साझा डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा हुई। इस वैश्विक मंच पर जुड़ने का मुख्य उद्देश्य यह तय करना है कि भविष्य की वायरलेस तकनीकें केवल तेज ही न हों, बल्कि सभी भागीदार देशों के सुरक्षा मानकों और आर्थिक हितों के अनुकूल भी काम करें।
टेलीकॉम सेक्टर के जानकारों का मानना है कि आने वाला दशक पूरी तरह से डेटा और अल्ट्रा-फास्ट कनेक्टिविटी पर निर्भर रहने वाला है। 5G के बाद जब 6G तकनीक धरातल पर उतरेगी, तो यह केवल मोबाइल इंटरनेट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ऑटोमैटिक वाहन, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और अंतरिक्ष संचार प्रणालियों को पूरी तरह बदल देगी। इस वैश्विक मंच पर भारत की यह सक्रिय भागीदारी इस बात का संकेत है कि देश अब केवल तकनीक का उपयोग करने वाला बाजार नहीं रहा, बल्कि इसके विकास और दिशा तय करने में भी बराबर का साझीदार बन रहा है।




