भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा मोड़, पूर्व डीजीपी अभयानंद ने पुलिस कार्रवाई को बताया सीधी हत्या, कहा- दोषियों को मिल सकती है फांसी

भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में बीते सत्रह जून को हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले पर विवाद गहराता जा रहा है. मृतक के परिजनों द्वारा उठाए जा रहे सवालों के बीच अब बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अभयानंद ने भी पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पूर्व डीजीपी ने घटना के सामने आए वीडियो का हवाला देते हुए इसे मुठभेड़ मानने से साफ इनकार कर दिया और कहा कि यह प्रथम दृष्टया सीधे तौर पर हत्या का मामला लगता है.
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत के दौरान ‘एनकाउंटर’ शब्द के इस्तेमाल पर ही आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे और समाज में इस शब्द का गलत तरीके से प्रयोग किया जा रहा है. जब तक इस तरह की मानसिकता बनी रहेगी, तब तक कानून व्यवस्था और पुलिसिंग की मूल भावना प्रभावित होती रहेगी. आत्मरक्षा में गोली चलाने के पुलिस के दावों पर उन्होंने कहा कि कोई भी अपनी रक्षा में कुछ भी दलील दे सकता है, लेकिन जो वीडियो फुटेज सार्वजनिक हुए हैं, वे बेहद स्पष्ट हैं. वीडियो देखने के बाद किसी भी तरह के संदेह की गुंजाइश नहीं बचती है और पूरा मामला कानूनन हत्या के दायरे में आता है.
मामले में कानूनी कार्रवाई और सजा की संभावनाओं पर बात करते हुए पूर्व शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कहा कि यदि इस केस की जांच निष्पक्ष तरीके से होती है, अदालत में सही साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं और गवाह अपने बयानों पर कायम रहते हैं, तो दोषियों का बचना नामुमकिन है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में हत्या के अपराध के लिए दो ही मुख्य सजाएं निर्धारित हैं- आजीवन कारावास या फांसी. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना में सीधे तौर पर संलिप्त लोगों को फांसी की सजा भी हो सकती है.
इसके साथ ही अभयानंद ने जांच के दायरे को बढ़ाने की मांग की. उन्होंने कहा कि केवल मौके पर ट्रिगर दबाने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि इस पूरी घटना के पीछे छिपे असली चेहरों और आदेश देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी सघन जांच होनी चाहिए. इसके लिए उन्होंने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और साइबर फॉरेंसिक तकनीक के इस्तेमाल की वकालत की ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना के वक्त किसे क्या निर्देश मिल रहे थे.
आजकल चर्चा में रहने वाले ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसे शब्दों पर तंज कसते हुए पूर्व डीजीपी ने कहा कि जब एनकाउंटर की अवधारणा ही पूरी तरह गलत है, तो हाफ एनकाउंटर जैसी बातें बेमानी हैं. इस तरह की शब्दावली को बढ़ावा देना न्याय व्यवस्था के लिए बेहद खतरनाक है. वहीं, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर भी उन्होंने असहमति जताई जिसमें अपराधियों को बिहार छोड़ने या श्मशान भेजने की बात कही गई थी. अभयानंद के अनुसार, किसी भी संवैधानिक गरिमा वाले पद पर बैठे व्यक्ति को इस प्रकार की भाषा के प्रयोग से पूरी तरह बचना चाहिए. फिलहाल इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच चल रही है, जबकि पीड़ित परिवार लगातार सीबीआई जांच की मांग पर अड़ा हुआ है.



