बिहार
ट्रेंडिंग

पतिलार की धर्म भूमि से निकलकर देश भर में गूंज रही कृष्ण निराला तिवारी की ओजस्वी वाणी

श्रीमद्भागवत कथा और सुमधुर भजनों से उत्तर भारत में छाए चंपारण के लाल, युवाओं को दिया 'राम और कृष्ण को जानने और मानने' का संदेश

पतिलार गांव की धर्म भूमि से निकलकर धर्म को ही अपनी कर्मभूमि बनाने वाले कृष्ण निराला तिवारी आज पूरे देश में अपनी सुमधुर आवाज और ओजस्वी वाणी का लोहा मनवा रहे हैं। विद्या भारती संस्थान द्वारा संचालित सरस्वती विद्या मंदिर, पतिलार के पूर्व छात्र रहे कृष्ण निराला तिवारी मुख्य रूप से एक प्रख्यात श्रीमद्भागवत कथा वाचक हैं। श्रीमद्भागवत कथा के साथ-साथ श्री राम कथा और भक्तमाल जी में भी उनकी गहरी रुचि है। कथा वाचन की उनकी शैली और उनके सुमधुर भजनों की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि आज उत्तर भारत के लोग उन्हें सुनने के लिए लालायित रहते हैं।

चंपारण से अयोध्या तक की यात्रा और जीवन दर्शन

चंपारण की माटी से निकलकर अयोध्या जी की पावन धरती पर अपनी किशोरावस्था बिताने वाले कथा वाचक कृष्ण निराला तिवारी जी का जीवन पूरी तरह से ईश्वर को समर्पित है। अपने आध्यात्मिक अनुभव को साझा करते हुए वे बताते हैं कि उनका तन चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे, लेकिन मन सदैव प्रभु श्रीकृष्ण एवं श्रीराम और ईश्वर की भक्ति में ही डूबा रहता है।

उन्होंने बताया कि उनके जीवन पर गो (गाय), गुरु और गंगा जी का अमिट प्रभाव है। यही कारण है कि गो-सेवा संवर्धन के साथ-साथ गुरु सेवा और गंगा आरती में उनकी विशेष रुचि रहती है। इसी आध्यात्मिक जुड़ाव के चलते उनका हरिद्वार और काशी जैसे पावन तीर्थ स्थलों पर भी निरंतर आना-जाना लगा रहता है।

परिवार के संस्कार और जड़ों से जुड़ाव

अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के संस्कारों को देते हुए कृष्ण निराला तिवारी जी कहते हैं कि यह पिताजी द्वारा स्थापित सिद्धांतों और माताजी द्वारा किए गए पुण्य कर्मों का ही प्रतिफल है। इसका प्रभाव इतना गहरा है कि न केवल वे, बल्कि उनकी छोटी बहन नारायणी तिवारी भी आज धर्म ध्वज को मजबूती से धारण कर कथा परंपरा में अपना बहुमूल्य योगदान दे रही हैं।

अपनी मातृभूमि और अपनी जड़ों के प्रति अगाध प्रेम व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा:

“यह ग्राम देवी माता बहुरिया के आशीर्वाद और ग्रामीण जनों के धर्म कार्यों में रुचि का ही प्रतिफल है कि आज देश के कोने-कोने से लोग मुझसे जुड़े हैं। मेरे लिए आज भी सबसे बड़ा मंच मेरे गांव की कथाओं में बिछने वाली वह चटाई है, जिसके तेज के कारण ही मैं आज व्यासपीठ पर बैठने के योग्य हो सका हूं।”

युवाओं के नाम विशेष संदेश

आज की युवा पीढ़ी के लिए कथा वाचक कृष्ण निराला तिवारी का एक स्पष्ट और प्रेरणादायक संदेश है। वे युवाओं से विनती करते हुए कहते हैं कि वे न केवल श्रीराम एवं श्रीकृष्ण जी को ‘जानें’, अपितु उन्हें ‘मानें’ भी। उनके अनुसार, अपने आचरण में राम एवं कृष्ण के आदर्शों को उतारने से न केवल युवाओं के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होगा, बल्कि इससे परिवार, समाज और यह संपूर्ण राष्ट्र सशक्त होकर प्रगति के नए आयाम स्थापित करेगा।

कथा वाचन हेतु संपर्क सूत्

कथा वाचन के आयोजन हेतु आप कृष्ण निराला तिवारी जी से सीधे संपर्क कर सकते हैं:

संपर्क नंबर: 9661998483, 9955171699

फेसबुक पर जुड़ें: कृष्ण निराला तिवारी कथा वाचक फेसबुक

चंपारण के लाल डॉ. प्रशांत रमण रवि को मिलेगा ‘विष्णु प्रभाकर स्मृति सम्मान’, यूट्यूब पर हिंदी साहित्य को दी नई पहचान

संबंधित लेख

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button